आरुषि
Posted in साप्ताहिक कालम on May 26th, 2008 1 Comment »
नगर नोएड़ा लगता कुछ घबराया है
एक पिता ने रिश्ता नहीं निभाया है
निठारी को नहीं भूला हम पाये थे
आरुषि ने फिर से हमें रुलाया है
मुख पृष्ठ | परिचय | चित्र-दीर्घा | पुस्तकें | आडियो-विडियो | अपने मित्र को बताएं | अपनों की नज़र में | प्रेस | सम्पर्क | My Blog
Posted in साप्ताहिक कालम on May 26th, 2008 1 Comment »
नगर नोएड़ा लगता कुछ घबराया है
एक पिता ने रिश्ता नहीं निभाया है
निठारी को नहीं भूला हम पाये थे
आरुषि ने फिर से हमें रुलाया है
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 8th, 2008 No Comments »
वक्त के तेवर पी एम जी पहचान गये
साम्यवादियों को भी थोड़ा जान गये
परमाणु मुद्दा सुलझाने को मोहन जी
वाजपेयी को भीष्म पितामह मान गये
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 1st, 2008 No Comments »
लोकसभा में खूब बजे हैं बाजे जी
सत्ता वाले मिलजुलकर हैं नाचे जी
वित्त मंत्री खूब पिटारा खोला है
चुनाव हमारे लगता है दरवाजे जी
Posted in साप्ताहिक कालम on Feb 25th, 2008 No Comments »
नया विधेयक परिसीमन का आया है
नव खुशियाँ और नया सवेरा लाया है
दशकों से जो कुर्सी को हैं तोड़ रहें
चेहरा उनका लगता कुछ मुरझाया ह
Posted in साप्ताहिक कालम on Feb 1st, 2008 No Comments »
वैद्य मौत का यार हमारे भारत में
कैसा है व्यापार हमारे भारत में
पुलिस के सम्मुख किडनी बेच गया देखो
डाक्टर सीमा पार हमारे भारत में
Posted in साप्ताहिक कालम on Jan 23rd, 2008 No Comments »
हाथ लगा और शेयर देखो फिसल गए
अम्बानी जी सबसे आगे निकल गए
आम आदमी जब भी गया दलाल स्ट्रीट
शेयर बनकर शेर उसे ही निगल गए
Posted in साप्ताहिक कालम on Jan 16th, 2008 No Comments »
माया जी का जन्मदिन खूब मचा तूफान
बसपा वाले कर रहे बहना का सम्मान
बहना का सम्मान केक काटा है भारी
नोट चढ़ाओ खूब मची है मारामारी
कह चेतन कविराय राज की देखो छाया
मुलायम भी रटते हैं अब माया माया
Posted in साप्ताहिक कालम on Jan 16th, 2008 No Comments »
पहले थे बड़े ही गोल्ड बकनर
उम्र से हो गए अब ओल्ड बकनर
ईमान की बालिंग नहीं झेल पाए
इंडिया टीम से हुए बोल्ड बकनर
Posted in साप्ताहिक कालम on Jan 1st, 2008 No Comments »
दौ हजार सात में कांग्रेस की हार
दौ हजार आठ में सोनिया जी बीमार
भाजपा ने कर दिया है भगवा अलर्ट
दिल्ली में आ रही है अडवाणी की सरकार
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 28th, 2007 No Comments »
मुशर्रफ की मेहरबानी हो गई
लोकशाही बेजुबानी हो गई
आतंक की गोली चली और देखिये
बेगम भुट्टो खुद कहानी हो गई
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 22nd, 2007 No Comments »
कलाम का जाना खटका
मायावती के चक्कर में पुनः
यू॰ पी॰ भटका
ऐश अभिषेक की शादी
डेरा सच्चा सौदा की बर्बादी
नन्दी गांव में तनाव
राम सेतु तोड़ने का प्रस्ताव
दिल्ली निगम में भाजपा का राज
गुजरात में मोदी जी का काज
20-20 में भारत की जीत
और पाकिस्तान को मिली
टेस्ट श्रंखला की हार
2007 को सादर नमस्कार
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 17th, 2007 No Comments »
विद्या का ये मंदिर लहूलुहान है
बच्चे-बच्चे में हिंसा की तान है
कृष्ण सुदामा को गुरुकुल में मार रहा
स्वर्गलोक में बापू भी हैरान है
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 12th, 2007 No Comments »
नहीं कोई अब जिन्ना से प्यार है
ना ही कोई संघ से तकरार है
अडवाणी जी बैठें पी एम कुर्सी पर
अब ये राजग को भी स्वीकार है।
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 8th, 2007 2 Comments »
मधुशाला की मदिरा भी शर्माएगी
बाला जब-जब हाला लेकर आएगी
बाला के नयनों की हाला के आगे
मदिरा तो पानी-पानी हो जाएगी
Posted in साप्ताहिक कालम on Nov 27th, 2007 1 Comment »
कुतुब के रास्ते से मैट्रो को हटाना जरूरी है
ताजमहल को धुंए से बचाना जरूरी है
रामसेतु भी है जन-जन की आस्था
फिर क्यों उस आस्था को मिटाना जरूरी है
Posted in साप्ताहिक कालम on Nov 23rd, 2007 2 Comments »
मनमोहन जी ने कहा राहुल हैं युवराज
कांग्रेस और देश का भला करेंगे काज
भला करेंगे काज बोलना सीख रहे हैं
संसद में भी थोड़ा थोड़ा दीख रहे हैं
कह चेतन कविराय आरती, वन्दन गाओ
आने वाले पी॰ एम॰ जी को शीश झुकाओ
Posted in साप्ताहिक कालम on Nov 7th, 2007 1 Comment »
कुर्सी बड़ी महान देखिये मियां जी
देश बड़ा परेशान देखिये मियां जी
आपातकाल में सांस नहीं ले पाओगे
खतरे में है जान देखिये मियां जी
Posted in साप्ताहिक कालम on Oct 26th, 2007 4 Comments »
पत्नी ने भी कैसा धर्म निभाया है
साल साल भर हमको खूब रुलाया है
करवा चौथ को एक दिन पूजा होती
हमको उल्लू उसने खूब बनाया है
Posted in साप्ताहिक कालम on Oct 20th, 2007 2 Comments »
संतों का सम्मान दशहरा होता है
दुष्टों का अपमान दशहरा होता है
राम द्रोहियों को फांसी पर लटकाओ
धर्म विजय अभियान दशहरा होता है।
Posted in साप्ताहिक कालम on Oct 15th, 2007 No Comments »
नेताओं में छल ही छल है दिल्ली में
बस वालों में पूरा बल है दिल्ली में
ब्लू लाईन को रोक नहीं सकता कोई
केवल मौत ही इसका हल है दिल्ली में
Posted in साप्ताहिक कालम on Oct 5th, 2007 No Comments »
सिंहासन और प्याज का गहरा है सम्बन्ध
कुर्सी आई और गई अद्भुद इसकी गंध
अद्भुद इसकी गंध कांग्रेस डोल रही है
शीला आंटी मुख से कुछ ना बोल रही है
कह चेतन कविराय प्याज लगता है भारी
देखें किसके हाथ में होगी दिल्ली प्यारी
Posted in साप्ताहिक कालम on Sep 25th, 2007 No Comments »
सारे जग में ऊँची शान
क्या कर लेगा पाकिस्तान
सारी दुनिया मान गई
विश्व विजेता हिन्दुस्तान
Posted in साप्ताहिक कालम on Sep 21st, 2007 1 Comment »
पावन धवल चरित्र हमारी दिल्ली में
पुलिस बनी है मित्र हमारी दिल्ली में
भर्ती होने से पहले ही दिखा दिया
अपना नंगा चित्र हमारी दिल्ली में
Posted in साप्ताहिक कालम on Sep 14th, 2007 2 Comments »
दिल्ली आसन पर जमे हैं राहु केतु
राम का ये भक्त है बस वोट हेतु
राजनीति में उलझ कर रह गया है
क्या बचेगा राम सेतु राम सेतु
Posted in साप्ताहिक कालम on Aug 4th, 2007 No Comments »
मल्होत्रा अशोक ने कैसा किया कमाल
चाय चक्कर में हुआ देखो मालामाल
देखो मालामाल हुई नेता से यारी
विधानसभा में खूब चलाई ठेकेदारी
कह चेतन कविराय धन्य है सी बी आई
पता लगेगा किस किसने है रिश्वत खाई
Posted in साप्ताहिक कालम on Jul 28th, 2007 2 Comments »
महिलाओं की पूजा करता यूपीए
प्रतिभा पाटिल पर है मरता यूपीए
केवल चाटूकार पसन्द हैं मैडम को
किरण बेदी जी से डरता यूपीए
Posted in साप्ताहिक कालम on Jul 21st, 2007 No Comments »
हिन्दी अब तो अमरीका में जायेगी
हिन्दी से हिन्दा बनकर के आयेगी
अमरीका से लौटी अपनी हिन्दी माँ
भारत में फिर कुछ तो इज्जत पायेगी
Posted in साप्ताहिक कालम on Jul 13th, 2007 No Comments »
शीला जी को कुर्सी से ही प्यार है
ब्लू लाईन का चहुंओर चीत्कार है
मौत के सौदागर सड़कों पर नाच रहे
निद्रा में क्यू दिल्ली की सरकार है
Posted in साप्ताहिक कालम on Jul 6th, 2007 No Comments »
आतंकी साजिशें जंजाल हो गई
पाकिस्तानी जनता बेहाल हो गई
मुशर्रफ जी शांति का ढोल पीटते
लाल मस्जिद खून से लाल हो गई
Posted in साप्ताहिक कालम on Jun 15th, 2007 No Comments »
रायसीना हिल्स की प्यारे अलग छटा है अलग है वादी
यू पी ए और एन डी ए की टूट गई चुनावी शादी
शेखावत तो निश्चित होगा राष्ट्रपति हो या पत्नी हो
एक ओर शेखावत दादा दूजी ओर शेखावत दादी
Posted in साप्ताहिक कालम on Jun 8th, 2007 No Comments »
विश्वविद्यालय एडमिशन क्या कहना
भटक रहा है तन और मन क्या कहना
लगता है पैरिस ही उत्तरा दिल्ली में
चहुंओर है फन ही फन क्या कहना
Posted in साप्ताहिक कालम on Jun 2nd, 2007 2 Comments »
राजस्थान में है मचा देखो क्या हुडदंग
गुर्जर मीणा में छिड़ी बड़े जोर की जंग
बड़े जोर की जंग बसुन्धरा दूर खड़ी है
राजमार्गों पर भी मित्रों जंग छिड़ी है
कह चेतन कविराय आरक्षण बंद कीजिये
खुशहाली के मार्ग का प्रबन्ध कीजिये
Posted in साप्ताहिक कालम on May 25th, 2007 No Comments »
मनमोहन सरकार का बीता तीजा वर्ष
कांग्रेस में अब है नहीं देखो कोई हर्ष
देखो कोई हर्ष महंगाई बढ़ती जाती
हर चुनाव में मात सोनिया मुँह की खाती
कह चेतन कविराय करो ना जनता दोहन
फिर से ना आ पाओगे तुम प्यारे मोहन
Posted in साप्ताहिक कालम on May 24th, 2007 No Comments »
हरे हरे पर्वत के ऊपर गुफा दीखती है सुंदर
गोहाटी में गोरा माँ है, मेघालय में शिवशंकर
गौमाता के थन से निकली बूंद बूंद ये कहती है
एकलव्य की भूमि का पावन है कंकर कंकर
Posted in साप्ताहिक कालम on May 24th, 2007 No Comments »
नकल असल का बोल रहे ये पंगा है
गुरूओं की भूमि पर फैला दंगा है
सच्चा सौदा झुकने को तैयार नही
आग लगाने का ये कैसा धंधा है
Posted in साप्ताहिक कालम on May 21st, 2007 No Comments »
आग लगी है पूर्वोत्तर की घाटी में
धर्मों के षडयंत्र हमारी माटी में
ब्रह्मपुत्र के बेटों निद्रा को छोडो
बांग्लादेशी है अपनी गोहाटी में ।
Posted in साप्ताहिक कालम on May 11th, 2007 No Comments »
तीन बी जब मिल गये ब्राह्मण बसपा बहन
यू॰ पी॰ में फिर हो गया बाकी सबका दहन
बाकी सबका दहन भले हो राहुल गांधी
बच्चन से भी नहीं चली वोटों की आंधी
कल्याण सिंह भी राम नाम को जाप रहे है
अमर मुलायम माया जी से कांप रहे है
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 27th, 2007 No Comments »
बालीवुड से हालीवुड की गली गई
सुंदर बाला शिल्पा अपनी छली गई
एडस रोकने को लाई थी गेरे को
एडस फैला कर दिल्ली से क्यों चली गई
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 27th, 2007 No Comments »
यू॰ पी॰ में ही फिर से आना बच्चन जी
अमर सिंह का साथ निभाना बच्चन जी
निठारी के बच्चें लेकिन कहते हैं
मुलायम को संग में लाना बच्चन जी
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 25th, 2007 No Comments »
ऐश्वर्य अभिषेक जहाँ जहाँ भी जायेंगे
टी॰ वी॰ चैनल अपना धर्म निभायेंगे
जूते चप्पल पड़ते हैं तो पड़ जायें,
हनीमून की तस्वीरें भी लायेंगे
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 24th, 2007 No Comments »
अपनी कॉपी खुद ही अब तो जांच रहे हैं राहुल जी
निज पुरखों की गरिमा को ही बांच रहे हैं राहुल जी
अटल बिहारी के शासन में रोड़ बने जो भारत में
अब उन पर क्यूं झूम झूम कर नाच रहे हैं राहुल जी
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 23rd, 2007 No Comments »
हर दिन कोई राह खोजते दादा बी
पंडों के घर रोज दौडते दादा बी
ऐश की डोली जब तक घर पर ना आई
मंदिर मंदिर हाथ जोडते दादा बी
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 21st, 2007 No Comments »
सांसद भी अब हो गये बड़े कबूतरबाज
संकट में है भाजपा बंद हुई आवाज़
बंद हुई आवाज़ चढ़ा नेता का पारा
बुरे फंसे है नेता अपने श्री कटारा
रोज रोज ही संसद में घोटाला होगा
लोकतन्त्र का चेहरा सचमुच काला होगा॥
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 13th, 2007 No Comments »
दिल्ली पुलिस होशियार हैं कटते अब चालान
एक डन्डे से हांकते सबको एक समान
सबको एक समान दुःखी हैं छोरा छोरी
शीशे हो गये साफ हो कैसे जोरा जोरी
कह चेतन कविराय मोबाईल सुनना भारी
कामनवेल्थ खेल की लगता है तैयारी
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 7th, 2007 No Comments »
एम॰ सी॰ डी॰ में आ गई भाजप की सरकार
कांग्रेस के सिर पर पड़ी तोड़ फोड़ की मार
तोड़ फोड़ की मार खुराना मुंह लटकाये
हाथी की भी चाल देखकर सब घबराये
कह चेतन कविराय शेर भी लगते बिल्ली
हार गये सब नेता जीती अपनी दिल्ली
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 5th, 2007 No Comments »
चैपल ने
सचिन को बाउंसर मारा और
सचिन ने पलटकर, चौका
चैपल आउट
वर्ल्ड कप से आउट टीम
की शब्द बोछार पर कह सकता हूँ
खेल में सदभावना की गन्ध हो
कोक पेप्सी के विज्ञापन बन्द हो
देश में सब खेल तब ही आ सकेंगें
क्रिकेट पर दस साल का प्रतिबन्ध हो ।
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 3rd, 2007 No Comments »
निगम चुनाव के
कारण भाईचारा बढ रहा है,
जो नेता कभी
राम राम भी नहीं करता था
आजकल पांव में
पड रहा है।
कल ही मेरा पडोसी नेता
राम लुभाया
घर आकर बोला क्यूं चेतन भाया
बटन देखकर दबाना और
इस चुनाव में हमको ही जिताना।
मैने कहा - नेता जी
आ रही है पांच अप्रैल की प्रभात
ठीक है आपकी बात परन्तु
क्या इसके बाद भी होगी
आपसे मुलाकात।
मेरे […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 3rd, 2007 No Comments »
आजकल राजा पेट से नहीं
पेटी से बनता है और अब तो
पेटी भी गई आई है और
राजा चुनने के लिये
हमने वोटिंग मशीन बनाई हैं।
चुनाव के अंतिम दौर में
वोटिंग मशीन के लिये
कसरत जारी है तथा
साम, दाम, दण्ड, भेद
सर्वनीति अपनाना
हर प्रत्याशी की लाचारी है।
इस चुनाव से
सामाजिक टूटन बढ़ रही हैं
गुण्डों में मस्ती चढ़ रही हैं
जातिवाद मुंह खोले खडा […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 31st, 2007 No Comments »
दिल्ली की बडी सी
कालोनी में
छोटा सा झुग्गी कबीला
कबीले में चलती है
रोज वोट लीला
कबीले के छुटभैय्या
नेता के संग
हर पार्टी का
प्रत्याशी आता है और
मदिरा, साईकिल तथा सिलाई मशीन के
लालच दिखाता है
परन्तु कबीले के छुटभैय्या नेता
का बडा ताव है और
हर प्रत्याशी के लिये उसका
अलग अलग भाव है
ये लोकतन्त्र नहीं
व्यापार तन्त्र है और
जिस पार्षद की जेब भारी होगी
उसके पास […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 30th, 2007 No Comments »
जब से भारत
वर्ल्ड कप क्रिकेट से
बाहर आया है
निगम चुनाव में
उत्साह छाया है
क्रिकेट का बुखार
चुनाव अभियान में
कांटे बो रहा था
रात भर क्रिकेट में
डूबा पार्टी कार्यकर्ता
प्रातः चुनाव अभियान के
समय सो रहा था
लगता है निगम उम्मीद्वारों ने ही
मिलकर जोर लगाया है और
भारत को वर्ल्ड कप में हराया है
वर्ल्ड कप तो गया अब
निगम कप का अभियान जारी है
आओ देखें […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 29th, 2007 No Comments »
कांग्रेस के अजय माकन का
दिल्ली मास्टर प्लान
दिल्ली का हर नागरिक चलेगा अब
सीना तान
ना सिलिंग
ना बुलडोज़र
खुशहाली ही खुशहाली
सब मिलकर बजाओ ताली
अब रोज ही होगी दिवाली पर
इतना रखना ध्यान
हे ! वोटर कृपानिधान
दिल्ली निगम चुनाव में
हाथ का बटन ही दबाना
और एम॰ सी॰ डी॰ में
कांग्रेस को ही लाना
भला हो भगवान
बटन दबाने से ही पूर्व
खुल गई पोल
और कांग्रेसी नेता को […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 28th, 2007 No Comments »
चुनावी दंगल में खूब
मजा आ रहा है
कांग्रेस का कार्यकर्ता
भाजपा के नारे लगा रहा है
भाजपा वाला परेशान है
दिल में खुराना और
चेहरे पर कमल की मुस्कान है
कुछ तथाकथित नेता तो
कर रहे है कमाल
नाश्ता के समय बसपा और
दोपहर भोजन के समय
सपा से कदम ताल
सन्धया समय चौटाला और
रात्रि में शरद पवार के गले में माला
कुल मिलाकर हर दल में
विभीषण […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 27th, 2007 No Comments »
दिल्ली निगम चुनाव में
कमल कुछ मुस्कुरा रहा है
हाथ घबरा रहा है
हाथी पगलाया है और
खुराना ने चौटाला का
ऐनक लगाया है
मुलायम की साईकिल रफ्तार मंद है तथा
शरद पवार की घडी बन्द है
निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं और
सब एक दूजे को यूं बोल रहे हैं
प्राणों से भी प्यारा है
दिल्ली निगम हमारा है
खटका जरा दबा देना
गूंज रहा ये नारा […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 27th, 2007 No Comments »
नवरात्र के कारण
चुनाव प्रचार चल रहा है
फीका – फीका
किसी भी दल के किसी कार्यकर्ता में
कोई उत्साह नहीं दीखा
अब दुर्गा अष्टमी के बाद
चुनावी भैरूं की बारी है तथा
मदिरा का प्रसाद चढाना
लोकतन्त्र में
हर प्रत्याशी की
लाचारी है
प्रसाद चढाओ या
करो पूजा
लेकिन
जब तक वोटर देवता नहीं पसीजा
परिश्रम बेकार है आओ देखें
इस बार
दिल्ली नगर निगम में
किसकी सरकार है।
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 23rd, 2007 No Comments »
परीक्षा में सवाल पूछा
पार्षद के लिये योग्यता बताओ
दिल्ली के विद्यार्थी ने लिखा
लोकतन्त्र की मजबूरी है अतः
पार्षद बनने के लिये
बडे नेता का बेटा, पत्नी,
सचिव या चमचा होना
बहुत जरूरी है,
बालक के इस जवाब पर कह सकता हूँ
निगम पार्षद नोट कमाता
एम॰ एल॰ ए॰ विश्वास गवाता
सांसद अपना शर्मिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी जिन्दा है।
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 20th, 2007 No Comments »
दिल्ली के निगम चुनाव का
सेमीफाइनल यानी टिकटों का वितरण
वित्त का रण ही रहा
कम शब्दों में
वित्त कि जीत
विचार की हार, चाहे
विपक्ष हो या सरकार
आम कार्यकर्ता यानी ग्रासरुटर
दरी बिछाता रहा और
पैराशूटर अपने आकाओं का
आशीर्वाद पाता रहा
इस दृश्य पर यही कह सकता हूँ
भ्रष्टाचारी बेल हमारी दिल्ली में
चोर चोर का मेल हमारी दिल्ली में
भूमाफ़िया नेता के संग मिल बैठा
सता […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 13th, 2007 No Comments »
क्रिकेट
उन देशों में छाया है
जहाँ अंग्रेजो ने डन्डा बजाया है
अमरीका, चीन जापान
कहीं नही गूंजती क्रिकेट की तान
ये सब खेल जगत के हीरो हैं
पर हम क्रिकेट को छोड
सब खेलो में जीरो हैं
वर्ल्ड कप के युद्ध पर
यही कह सकता हूँ -
ये कैसा त्यौहार हमारे भारत में
कैसी मारामार हमारे भारत में
सब खेलों को लील गया क्रिकेट बल्ला
क्रिकेट का […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 6th, 2007 No Comments »
होली के दिन
झारखंड में
हिंसा का ताण्डव
देखकर लगता है
नक्सलवाद की जड़
भारत में गहरी है
और उसके सामने
लोकतांत्रिक सरकार बहरी है
सांसद सुनील महतो की
हत्या पर यहीं कह सकता हूं
आतंकी सरकार साथियों भारत में
कदम कदम पर हार साथियों भारत में
सांसद महतो की हत्या पर सब चुप हैं
ये कैसा त्यौहार साथियों भारत में ।
Posted in साप्ताहिक कालम on Feb 21st, 2007 No Comments »
दिल्ली में आजकल
बसन्त उत्सव नही अपितु
टिकटोत्सव की बहार है और
पार्क के बजाय
हर नेता के दरवाजे
लम्बी लम्बी कतार है
टिकट प्रेमियों के हाथ
फूल-पत्र नही
बायोडाटा प्रोफाईल है और
हर टिकटार्थी
स्वयंभू सन्त वेलेंटाइन है
एक सन्त ने दूजे से कहा
हर दिन उपकार करता हूँ
जनता से प्यार करता हूँ
टिकट जो मिल जाये तो
हर वादा स्वीकार करता हूँ ॥
Posted in साप्ताहिक कालम on Feb 14th, 2007 No Comments »
तीसरी शताब्दी के
सन्त वेलेंटाइन
प्रेम के लिये शहीद हो गये
सन्त ने कहा कि
प्यार कर और भारत में भी
पाँच हजार साल पूर्व श्री कृष्ण ने कहा
प्यार कर अतः
कृष्ण के देश को
सन्त वेलेंटाइन से कैसा डर
परन्तु भारत में
वेलेंटाइन डे के नाम पर जो
तथाकथित प्रदर्शन होता है
उसके लिये यहीं कह सकता हूँ
प्रेमी जोडा पार्क में और
मौसम फाईन
बोल रहे हैं […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Feb 7th, 2007 No Comments »
पाकिस्तानी आतंकवादी का
बांग्लादेश के रास्ते
दिल्ली आना तथा
वारदात करने से पूर्व पकडा जाना
दिल्ली में आतंकियों की मनमानी हैं
लगता है दिल्ली भारत की नहीं
आतंक की राजधानी है ।
संसद हो या
मिन्टो रोड
दिन हो या रात
पुलिस करती रही
आतंकियो से दो-दो हाथ
पुलिस को बधाई ।
भारत में किन्नर समुदाय भी
अपना राष्ट्रधर्म निभाता है
तथा अपने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में
पाकिस्तान को छोड
सभी पडोसी देशों
को […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Feb 2nd, 2007 No Comments »
लंदन में
शिल्पा को
तंग करने का बदला
रतन टाटा ने लिया तथा
कोरस की नीलामी पर
अंग्रेजो को घायल किया
भारत की इस जीत पर
कह सकता हूँ
दुनिया भर में फैल गया सन्नाटा है
हर दादा के मुँह पर अपना चाटा है
लंदन की गलियों में अब ये गूंज रहा
कोरस का मालिक भारत का टाटा है।
Posted in साप्ताहिक कालम on Jan 25th, 2007 No Comments »
गणतन्त्र या रिपब्लिक
प्रजातन्त्र या लोकतन्त्र
मतलब साफ है,
अब राजाओं का नही
जनता का राज है, परन्तु
जनता का अपने ही तन्त्र पर
क्रोध बढ़ता जा रहा है और
मतदान का प्रतिशत
लगातार घटता जा रहा है।
जाति धर्म को नही
देश को करें मतदान, और
सब मिलकर कहें
हमारा गण्तन्त्र महान।
Posted in साप्ताहिक कालम on Jan 19th, 2007 No Comments »
यू॰के में
बिग ब्रदर शो मे
भाईचारा नही अपितु
घृणा का बोलबाला है
अत: रंगभेदी टिप्पणी के
कारण घायल अपनी
शिल्पा बाला है
वास्तव में
भारत ही है दुनिया का
बिग ब्रदर
अत: गांधी के भारत को
इन छोटी मानसिकता वालों से
कैसा डर
शिल्पा को ये ही सुझाव है –
आंसू नही बहाने होंगे
गीत प्यार के गाने होंगे
ये जो हम से घृणा करते
भारत के दीवाने होंगे ।
Posted in साप्ताहिक कालम on Jan 16th, 2007 No Comments »
उल्फा द्वारा
असम के
हिन्दी भाषियों पर हमला , मतलब
राष्ट्र की एकता अखंडता पर प्रहार
राष्ट्र भाषा का बहिष्कार
व लोकतंत्र का तिरस्कार है
काश आज सरदार के बजाय होते
सरदार पटेल, तो नही चलता
ये आंतकियों का खेल
केंद्र व असम की सरकार जागे
और देखें कि हिन्दी भाषी
असम से न भागें ।
राष्ट्र की एकता अखंडता का
ढोल पीटने वाले नेता
मौन हैं
आखिर उल्फा के […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Jan 3rd, 2007 No Comments »
हिन्दी सिनेमा के
महानायक को
उत्तरप्रदेश की तरक्की
इतनी प्यारी है कि
अब अगला जन्म भी
यू॰ पी॰ में लेने की तैयारी है
कामना अच्छी है
सच्ची है परन्तु
निठारी काण्ड देखकर भी यदि
आपका है ये विचार
तो हमें लगता है
आपको यू॰ पी॰ के बजाय
मुलायम और अमर सिंह
से ही है प्यार
अमिताभ जी !
हो सके तो
इस जन्म में
एक बार निठारी आओ
तथा मासूम बच्चो की वेदना […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 27th, 2006 No Comments »
नटवर का तेल
शिबु सोरेन को जेल
अफजल से डिलिंग
दिल्ली में सिलिंग
प्रिंस का होल
खुराना जी के बोल
अभिषेक का यशभारती और
ऐश्वर्य की आरती
राखी जैसी मिस
मिक्का जैसा किस
मुंबई के विस्फोट और
महाजन परिवार पर चोट
बाबा रामदेव का ज्ञान तथा
सिद्धु की मुस्कान
बिस्मिल्लाह का जाना और
सौरभ गांगुली का आना
ये लम्हे रहेंगे यादगार
2006 को सादर नमस्कार
आशा और विश्वास लिये
नव बर्ष खड़ा है […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 23rd, 2006 No Comments »
हिन्दी अध्यापक ने किया सवाल
माया मिली ना राम मुहावरे का
वाक्य मे प्रयोग करो
त्रिनगर के एक छात्र ने हाथ उठाया और
अध्यापक के कहने पर बताया
हमारे एक पार्षद ने
एक महिला के प्यार के चक्कर मे
जान गवाई और
उनकी महिला मित्र ने कुर्सी के चक्कर मे
जेल की हवा खाई
अतः इस घटना के साथ बहता हूँ
और एक नया दोहा कहता […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 17th, 2006 No Comments »
लोकतंत्र की जाने क्या मजबूरी है
हत्यारें की फांसी से क्यूं दूरी है
अफजल से जो प्यार कर रहे भारत में
उनका फांसी चढना बहुत जरूरी है ।
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 17th, 2006 No Comments »
पासवान चाँद है
शिबु साँप है
शरद पवार नन्दी है
मयावती आपके प्यार की बंदी है
करूणानिधि मृगछाला है
अमर सिंह जहर का प्याला है
मुलायम तीसरा नेत्र है
मुशर्रफ आपका मित्र है
लालू जी आपका त्रिशूल है और
आपसे टकराना भाजपा की भूल है ।
Posted in साप्ताहिक कालम on Dec 17th, 2006 No Comments »
काहे दुनिया मचा रही कोहराम है
वही सिकंदर जिसके कर में दाम है
ओसामा तो हाथ ना आया क्या करते
चढा दिया फ़ांसी ऊपर सद्दाम है ॥
Posted in साप्ताहिक कालम on Oct 4th, 2005 No Comments »
एस. एम. एस.
यानि सरदार मनमोहन सिंह
या कह सकते हैं- संकट में सांस
अर्जुन सिंह के भगवाकरण पर किताबी तीर
अमरिन्दर सिंह का सतलज नीर
आन्ध्रा का मुस्लिम आरक्षण
लालू का गोधरा सर्वेक्षण
सबकी अपनी अपनी दुकान है
देश जाये भाड में
सरदार जी इनसे परेशान है
सोनिया व साम्यवादियों से आग्रह है
डुगडुगी बजाओ
अपने इन बंदरो को समझाओ
और मनमोहन सिंह के साथ मिलकर
देश को […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Sep 27th, 2005 No Comments »
परिवारवाद के जाने की तैयारी हैं
क्योंकी लालूवाद सब पर षरी हैं
भाई-भतीजावाद से बचने की
देखिये कैसी है कला
बीबी मुख्यमंत्री और
साला संसद को चला
दूसरा राज्यसभा के लिये तैयार हैं
और तीसरे को कुर्सी का इन्तजार हैं
बीबी से प्यार के मामले में
शाहजंहा भी शर्माते हैं
जब लालू को अपने से आगे पाते हैं
शाहजंहा ने तो केवल ताजमहल बनवाया
लालू ने ताज […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Sep 20th, 2005 No Comments »
यू. पी. ए. सरकार ने
चार राज्यपालों को हटाया
बधाई!
आखिर देर ही से सही
काग्रेंस को अकल तो आई
साम्प्रदायिक शक्तियों पर की है
करारी चोट
इस कारण ही तो जनता ने दिये थे
आपको वोट
अब कम से कम चार राज्यों में
साम्प्रदायिक सदभाव बना रहेगा, और
काग्रेंस का झन्डा तना रहेगा
हमने गृह मंत्री से पूछा
खुराना जी को जीवन दान? समझ नही आया
उन्होने तुरन्त […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Sep 11th, 2005 No Comments »
लालू, चिदंबरम, मोहन जी सरदार
बजट बनाया है शानदार
एक लाख आयकर सीमा के लिये
धन्यवाद करें, स्वीकार
काश! जसवन्त-यशवन्त भी सुन पाते
जनता की पुकार, तो
एन. डी. ए. की नही होती बुरी हार, पर
बिहार के मामले में किया हैं घोटाला
सत्तापक्ष के मुंह पर लगा हैं ताला
बिहार पैकेज को पुन: देकर
ताली पिटवा रहे हैं
यानि कविता अटल जी की
अपने नाम से […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Sep 4th, 2005 No Comments »
हमने अग्नि मिसाईल बनाई
उसने भी गौरी उडाई
हमने किये पाँच परमाणु टेस्ट
उसने भी किये छ: परमाणु वेस्ट
हमने क्रिकेट में वर्ल्ड कप जीता
उसने भी जीता
हमने वर्ल्ड कप हारा
उसने भी हारा
हमने कठपुतली मार्का
एक अर्थशास्त्री को प्रधानमंत्री बनाया
उसने भी तुरन्त जमाली को हटाया, और
अब मनमोहन सिंह मार्का
एक अर्थशास्त्री की खोज जारी है
देखें किसकी बारी है?
काश […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Aug 28th, 2005 No Comments »
एक ओर कानफाडू मीका तथा
दूसरी ओर आयटम गर्ल राखी सावंत
दोनो में हो गई भिडंत
क्या करती बेचारी मिस
जब मीका ने जनता के बीच
कर दिया किस
राखी जी !
बर्थडे को बर्थडे-बॉय का करते हैं सम्मान
अतः इतना तो रखते ध्यान कि
शीशे के घरों में रहने वाले
दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते
फिर भी आप एक सूत्र अपनायें
कुछ राखियां घर से
पर्स में […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Aug 21st, 2005 No Comments »
जैसे ही खुला प्रवीण महाजन के
मुँह का ताला
बोला प्रमोद ने मुझे कुत्ते की
तरह पाला
ये सुन मेरी गली का कुत्ता भौंका तो
मैं चौंका
कुत्ता बोला, ये तो है
हम कुत्तों का अपमान
आप ही बताओ
हमने कब अपने मालिक को काटा, श्रीमान
हमारी वफादारी तो जग विख्यात है
अपने को काटना ये तो
मनुष्य का स्वभाव है
कुत्ते के तर्क पर
मैं मौन था, आखिर
इस […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Aug 11th, 2005 No Comments »
1857 के क्रांति नायक
मंगल पाण्डेय पर
करता है हर हिन्दुस्तानी नाज
क्योंकि उसकी ही बन्दुक से
निकली थी
सबसे पहले आजादी की आवाज।
अंग्रेजों के विरुद्ध
मंगल पाण्डेय की उंगली
बन्दुक के घोडे पर, क्योंकि
गाय चर्बी के कारतूस नहीं थे स्वीकार
और यही था शाकाहार का चमत्कार
महावीर का शाकाहार
बन गया था आजादी का मन्त्र
और इसी मन्त्र के कारण हो गया
अपना भारत स्वतन्त्र।
Posted in साप्ताहिक कालम on Aug 4th, 2005 No Comments »
मनमोहन सरकार आपकी जय होवे
कर दिया बंटाधार आपकी जय होवे
नटवर जी ने कैसा रास रचाया था
सद्दाम बना जब यार आपकी जय होवे
मंत्री जी अब हवलदार को डांट रहे
जे॰ पी॰ हुये फरार आपकी जय होवे
जगह जगह विस्फोट हो गये दिल्ली में
दीवाली त्यौहार आपकी जय होवे
घाटी के ये बम धमाके बोल रहें
गुलाम हुये […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Jul 28th, 2005 No Comments »
सभा, सत्संग, सोसाईटी
क्लब हो या किटी पार्टी
समाजिक दायरा बढ़ रहा है परन्तु
बन्धु भाव घट रहा है।
रक्षाबन्धन सिस्टर्स डे और
करवा चौथ हसबैन्ड डे के रूप में
मनाने वाली पीढ़ी का प्रयास है सच्चा
काश! दीवाली को ब्रदर्स डे के रूप में
मनाते तो होता कितना अच्छा।
वास्तव में चौदह वर्षों से
भाई की प्रतीक्षा में व्याकुल
राम-भरत का मिलन ही दीवाली त्यौहार […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Jul 21st, 2005 No Comments »
गलत कहते है लोग कि
दिया जलता है
ना दिया जलता है ना बाती
काश! ये बात
हमारी समझ में आती कि
तेल मैत्री धर्म निभाता है और
बाती को बचाने
स्वयं को जलाता है
आईये राम व सुग्रीव सा
मैत्री भाव जगायें
असत्य की लंका जलायें
सत्य का डंका बजायें
दीवाली की हार्दिक शुभकामनायें
Posted in साप्ताहिक कालम on Jul 14th, 2005 No Comments »
बिहार राम लीला के मंच पर
राष्ट्र माँ ने कैकई
रेल माँ ने मंथरा तथा
परमाणु पिता ने दशरथ का
रोल निभाया तब कहीं
जाकर लोकतन्त्र के राम को
वनवास हो पाया
अब भरत सिर पर खडाऊं नहीं
अहंकार की पगड़ी लगाये बैठा है
न्याय का तराजू लिये
विश्वामित्र मौन है
आखिर इस वनवास के पीछे
कौन है?
Posted in साप्ताहिक कालम on Jul 7th, 2005 No Comments »
चुनाव युद्ध में
घायल लक्ष्मण के लिये
संजीवन बूंटी खोजते खोजते
हनुमान जी का हिमालय की बजाय
पाकिस्तान जाना और
वहाँ जिन्ना के जिन्न से टकराना
ये घटना लक्ष्मण को
वेन्टीलेटर पर लिटा गई
गये थे लक्ष्मण की मूर्छा तोड़ने पर
हनुमान जी को स्वयं ही मूर्छा आ गई
रामादल में भरत हनुमान पर चिल्ला रहे है
राम अपने ही घुटने सहला रहे है
लक्ष्मण की मूर्छा […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Jun 27th, 2005 No Comments »
पाकिस्तानी जिन्ना
कब्र से निकलकर अडवाणी के सिर चढ़े हैं
जिन्दा रहे तो देश को बांटा और
मर गये तो
भाजपा के पीछे पड़े हैं
अडवाणी जी को
क्या जरुरत थी जन्म भूमि जाने की
कब्र में बैठे जिन्ना से हाथ मिलाने की
अच्छा होता!
पाकिस्तानी जिन्ना के बजाय
आप भारत के महान जिन्नाओं को
अपने घर बुलाते
लालू-पासवान को गले लगाते
सोनिया को समझाते
कम्युनिस्टों के गुण गाते […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Jun 20th, 2005 No Comments »
कभी
कृष्ण की प्रतिष्ठा से
घबराकर इन्द्र देव बृज में बरसे
फिर मुंबई की
बार अप्सराओं के
नृत्य बन्द करने पर क्रोध आया
और आजकल
खुराना के आंसुओं से
इन्द्र देव घबराये है, इसलिये
जमकर बरसने
दिल्ली आये हैं।
Posted in साप्ताहिक कालम on Jun 13th, 2005 No Comments »
आसाम कांग्रेस के
वोट सौदागर
सिंहासन को मजबूत बनाते रहे और
बांग्लादेशियों को बुलाते रहे।
“अल्पसंख्यकों पर अत्याचार”
एक लुभावना नारा है
जिसको कांग्रेस ने
सदा उछाला है।
सुप्रीम कोर्ट के शानदार निर्णय पर
कांग्रेस में छाया क्रंदन
न्यायपालिका को वंदन
आसाम जन का अभिनंदन।
Posted in साप्ताहिक कालम on Jun 6th, 2005 No Comments »
पुणे यानी
उत्सव की बहार
आत्मा का श्रृंगार
जीवन का गीत
मन का संगीत
ओशो की वाणी और
प्यार की कहानी है, इसलिये
पुणे विश्व की राजधानी है।
Posted in साप्ताहिक कालम on May 30th, 2005 No Comments »
कुर्सी जिसको प्यारी थी
वो एक अडियल नारी थी
लोकतंत्र को फूंक दिया
जाने क्या लाचारी थी
पत्रकार भी क्या लिखते
कलम हुई दरबारी थी
कोई अपील दलील नहीं
हिटलरशाही जारी थी
जयप्रकाश का बिगुल बजा
धधक उठी चिंगारी थी
सिहांसन को पाने की
जनता की तैयारी थी
अंधियारा छटना ही था
उजियारे की बारी थी
जन आंदोलन के आगे
तानाशाही हारी थी
Posted in साप्ताहिक कालम on May 23rd, 2005 No Comments »
बिना भारतीय पासपोर्ट के
हुर्रियत नेताओं का पाकिस्तान जाना
पुलवामा में आतंकवादियों द्वारा
निर्दोषों को मारा जाना।
लगता है भारत-पाक
शांति प्रक्रिया अटक गई है और
मनमोहन सरकार भी
पाक दोस्ती की रास्तों में
कहीं भटक गई है।
सोनिया-मनमोहन जी
हुर्रियत आतंकियों के आगे
पूंछ मत हिलाओ
राष्ट्र के स्वाभिमान को बचाओ और
सही रास्ते पर शांति प्रक्रिया चलाओ।
Posted in साप्ताहिक कालम on May 16th, 2005 No Comments »
सेकुलर महान हमारे सांई जी
रंग बिरंगी शान हमारे सांई जी
अवधपुरी के ढांचे को रोते हैं पर
खिली हुई मुस्कान हमारे सांई जी
पी एम की कुर्सी का सपना ऑंखो में
जिन्ना पर कुरबान हमारे सांई जी
नया रूप और रंग कराची में देखा
मुस्लमान हैरान हमारे सांई जी
घर की आग संभालोगे तो […]
Posted in साप्ताहिक कालम on May 9th, 2005 No Comments »
काग्रेंस की प्रधान हमारी सोनिया जी
यू पी ए की जान हमारी सोनिया जी
मनमोहन जी प्रधानमंत्री बेशक हैं
बनी देश कप्तान हमारी सोनिया जी
राहुल गांधी और प्रियंका की मम्मी
‘रॉयल मदर’ महान हमारी सोनिया जी
इटली वाली बातों को अब छोड मियां
भारत की पहचान हमारी सोनिया जी
काग्रेंसी श्रद्धा से चरणों […]
Posted in साप्ताहिक कालम on May 2nd, 2005 No Comments »
गुरू परम्परा महान है
गुरू पुत्रो का विशेष स्थान है।
सरदार मनमोहन सिंह ने
गुरू ज्ञान को अपनाया और
अपनी सादगी और ईमानदारी का परचम
भारत में लहराया,
अब सरदार बूटा सिंह
इस परम्परा पर कालिख पोत रहे है
राज्यपाल के बजाय
सोनिया, लालू और
कम्युनिस्टों की कठपुतली बनकर
लोकतन्त्र के सीने में
चाकू घोंप रहे हैं।
बिहार हो या झारखंड
सिबते रजी हो या बूटा सिंह
ये सब राज्यपाल […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 25th, 2005 No Comments »
प्रकाश कारत व
वामपंथी बन्द कमरे में बैठकर
यू पी ए सरकार चला रहे हैं और
लड़ाई का नाटक करके
जनता को बेवकूफ बना रहे हैं।
लालू की अपनी दुकान हैं ओर
मायावती परेशान है
पासवान भारी है व
झारखंडी बाबा के भागने की तैयारी है।
कुल मिला के उत्तम है
एक वर्ष की यू पी ए सरकार
बधाई हें मनमोहन सरदार
सोनिया का आभार और
यू पी […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 18th, 2005 No Comments »
एक अनार सौ बीमार
कहावत मशहूर है परन्तु ये
लालू जी से दूर है।
लालू जी के लिये कहना होगा
एक बीमार सौ अनार
चारा घोटाला
आयकर मामले को टाला
रेल दुर्घटना
धायल पटना
जानलेवा हमले का बहाना और
बिना बहुमत सरकार बनाना
लालू का कमाल है और सच में
लालू कोई नेता नही
यू पी ए के लिये एक बबाल है।
सोनिया जी अपना फर्ज निभाओ और
लालू जी […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 11th, 2005 No Comments »
विधायक नही
मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा
गाड़ दिया हरियाणा में खूंटा
लोकतन्त्र का कैसा है सम्मान?
विधायक चुनें जनता और
मुख्यमंत्री हाईकमान।
विमान दुर्घटना में
दो मंत्रियों का जाना
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस से
मुख्यमंत्री को पसीना आना,
प्रचंड बहुमत के बाद भी
काग्रेंस सरकार पर
संकट के बादल छाये हैं और
हरियाणा के काग्रेंसी नेता
कुछ घबराये हैं।
जन प्रतिनिधियों आगे आओ
अपनी सरकार को बचाओ और
किसी एम.एल.ए. को ही […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Apr 4th, 2005 No Comments »
गुरू पुत्र
सरदार मनमोहन जी
वामपंथियों के सम्मुख
घुटने टेक रहे हैं और
हिन्दु देश नेपाल को बचाने
सेना नही भेज रहे हैं।
कभी गुरू गोबिन्द सिंह जी ने
हिन्दु की रक्षा के लिये बनाया था
खालसा पंथ और
आज हिन्दु संहार के लिये बना है
वामपंथ।
यूपीए का चमत्कार
पाकिस्तानी तानाशाही स्वीकार और
नेपाली राजतन्त्र को धिक्कार
लख लख बधाई
मोहन जी की सरकार।
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 27th, 2005 No Comments »
जरनल तेरा भारत आना अच्छा है
ख्वाजा जी को शीश झुकाना अच्छा है
बेशक क्रिकेट ने तो दिल को जोडा है
क्या हुर्रियत से हाथ मिलाना अच्छा है?
मनमोहन मैडम से मिलना ठीक मगर
अटल बिहारी के घर जाना अच्छा है
अमरीकी हथियारों की सौदेबाजी
फिर भी गीत अमन के गाना अच्छा है
काश्मीर […]
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 20th, 2005 No Comments »
सुदर्शन जी ने
सुदर्शन चक्र चलाया और
अटल जी ने अडवाणी जी को समझाया
उम्र की मजबूरी है और
आप दोनो का
सन्यास लेना बहुत जरूरी है।
भाजपा अब परेशान है क्योंकी
अटल-अडवाणी ही महान है
नई पीढ़ी में मारामार है क्योंकि
युवराज के लिये
लम्बी कतार है।
Posted in साप्ताहिक कालम on Mar 13th, 2005 No Comments »
भाजपा के
पच्चीस साल और
राम मंदिर का सवाल।
अडवाणी जी की रथ सवारी
अटल जी को कुर्सी प्यारी तो
क्या करेगी विहिप बेचारी?
सेकुलर राजग में
वचन निभाते निभाते
क्या खोया - क्या पाया
करें गम्भीर विचार, तभी होगा
रजत जयन्ती का सपना साकार।