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राजेश चेतन काव्य पुरस्कार (2007)

राजेश चेतन काव्य पुरस्कार (2007)

राजेश चेतन काव्य पुरस्कार (2007)

संस्कारों को चेतन करने के प्रयास

ओजस्वी कवि राजेश चेतन

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Oct 03, 11:30 pm

बहल, संवाद सहयोगी : बीआरसीएम पब्लिक स्कूल विद्याग्राम के प्रांगण में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने राजनेताओं पर जमकर काव्य बाण चलाए। कवि सम्मेलन का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मंच का संचालन कलकत्ता से आए जयकुमार रुसवा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ हरियाणा के राजेश चेतन ने भारतीय राजनीति के अपराधीकरण व परिवार पर रचित अपनी कविता से की। चेतन की पंक्तियां थी घर-घर में हरियण्याकश्यप है, कैसे प्रहलाद को बचाओगे। उत्तरप्रदेश से पधारे कवि आशीष अनल ने अपनी कविता यूं कही चाहे क्रिकेट हो या हो युद्ध वाला क्षेत्र तेरे साथ होती है अनहोनी ही बहुत है। कानपुर से आए कविता प्रमोद तिवारी ने अपनी कविता गाकर यू प्रस्तुत की राहों में भी रिश्ते बन जाते है, ये रिश्ते भी मंजिल तक जाते है। बिहार से पहुंचे कवि लाचपतराय विकट ने सुनाया यह विजय गाथा है आक्रोश के अंधारे की, पैदा तुफान के इस प्रचंड धारे की। कार्यक्रम के अंत में हरियाणी कवि यूसुफ भारद्वाज ने अपनी देहाती शैली से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।

पाञ्जन्य

हरियाणा जागरण

वीर अर्जुन

Press2

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