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जय हो तेरी शारदे माँ
हैं सभी तेरे पुजारी
ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने
आरती तेरी उतारी
वेद की पावन ॠचाएँ
तेरे कारण ही सँवरती
सप्त स्वर की दिव्य ध्वनि से
तू धरा की नींद हरती
तेरी वीणा के सुरों में
विश्व मंगल राग गूंजे
शारदे तेरा उपासक
तेरे शुभ चरणों को पूजे
तेरे मन्दिर में यहाँ माँ
काव्य संध्या सज रही है
तेरे हर साधक के स्वर में
तेरी वीणा बज रही है
मैं भी कुछ उदगार माते
तेरे चरणों में हूँ लाया
दे मुझे आशीष: अपना
माँ तेरे मन्दिर में आया

लाज तुम्हारे हाथ माँ, क्षमा करो हर भूल
जीवन मेरा धन्य हो यदि पाउँ पग-धूल
यदि पाउँ पग-धूल, लेखनी चलती जाए
दो मुझको वरदान यह जीवन सफल कहाए

मीरा,सूर, कबीर के, शीश धरा ज्यों ताज
मैं भी सुत हूँ आपका, रखना मेरी लाज
रखना मेरी लाज, रहूँ मैं सदा ही ‘चेतन’
काव्य-पुष्प नव नित्य करुँ माँ तुम्हें समर्पण

अभिनन्दन है उन वीरों का
जीवन तिल तिल जला गए जो
राष्ट्र-प्रेम का पाठ पढाकार
हमको जीना सिखा गए जो
आज प्रकाशित दसों दिशाएँ
देव-शक्तियाँ जाग उठी हैं
जाग उठा है सोया भारत
असुर-शक्तियाँ भाग उठी हैं
आओ मिलकर देश-भक्ति की
दीपशिखा को और बढाएँ
आज़ादी लाई है खुशियाँ
घर घर मंगल दीप जलाएँ

हवा विषैली है पश्चिम की
यहाँ न इसको बहने दो
भारत को भारत रहने दो
घर अपना मत ढहने दो ॥
निज पुरखों ने बलिदानों से
जिसको जग-सिरमौर बनाया
भारत को ‘सोने की चिड़िया’
सारी दुनिया ने बतलाया
मानवता हित पूर्ण विश्व को
हमने गीता-ज्ञान दिया था
जो भी आया, हमने उसको
भाई कहकर मान दिया था
आस्तीन के साँपों! तुमको
हमने गीता-ज्ञान दिया था
जो भी आया, हमने उसको
भाई कहकर मान दिया था
आस्तीन के साँपों! तुमको
हमने जी-भर दूध पिलाया
ज़हरीलो! तुमने डस-डस कर
भारत का क्या हाल बनाया
लेकिन अभी तो हमने तुमको
अपना एक रुप दिखलाया
क्रोध आया तो शत्रु-सर्प फण
हमने ऐड़ी तले दबाया
ज़िन्दा रहना चाहो तो, मत
क्रोध में हमको दहने दो
भारत को भारत रहने दो
घर अपना मत ढह्ने दो ॥
देव पाणिनि धन्य धन्य हैं
जग को अक्षर ज्ञान कराया
शून्य खोज, भारत ने जग को
प्रथम गणित का भान कराया
धन्वन्तरी ने सबसे पहले
रोगों का उपचार किया था
संजीवन विद्या के द्वारा
शव में भी सञ्चार किया था
राजनीति का ज्ञान न मिलता
अर्थशास्त्र कब जग में आता
भरत भूमि का चणक पुत्र जो
सारे जग को नहीं सिखाता
सुनें संस्कृति के दुश्मन अब
और नहीं पाखण्ड चलेगा
निज पुरखों के दिव्य ज्ञान का
भारत – भू पार दीप जलेगा
बांध स्वार्थ के और न बांधो
प्रेम की सरिता बहने दो
भारत को भारत रहने दो
घर अपना मत ढहने दो ॥
व्यवसायी बन आये गोरे
कूटनीति का दांव चलाया
घर की फूट हमें ले डूबी
भारत माँ को कैद कराया
त्याग, तपस्या, बलिदानों से
गोरों का साम्राज्य हिला था
खण्डित थी पावन भारत-भू
टूटा फूटा देश मिला था
अँग्रेजी ढर्रे पर ही जब
हमने शासन-तंत्र बनाया
कूछ भूले-भटके बेटों ने
अपने हाथों देश जलाया
वोट डाल निश्चिंत हुए हम
बेफिक्री की नींद सो गए
भ्रष्ट हो गए शासक अपने
नेता माला-माल हो गए
हमने न्यौता देकर खुद ही
मल्टी नेशन को बुलवाया
खूब विदेशी चकाचौंध में
अपनी आँखों को चुँधियाया
वस्तु, वास्तु, उद्योग कभी सब
हमने ही जग को सिखलाया
क्युँ भूले अब निज गौरव हम
क्यूँ निज संस्कृति को ठुकराया
आयातित चीज़ों का आखिर
कब तक हम उपयोग करेंगे
और हमारे संसाधन का
दोहन कब तक लोग करेंगे
अर्थ-तन्त्र है विवश हमारा
जाल कर्ज़ का कसता जाता
‘सोने की चिड़िया’ भारत को
नाग विदेशी डसता जाता
जला विदेशी माल की होली
ब्यार स्वदेशी बहने दो
भारत को भारत रहने दो
घर अपना मत ढहने दो ॥

क्या खोया है, क्या पाया है
आज तुम्हें बतलाते हैं
आओ साथियों, देशवासियो
भारत तुम्हें दिखाते हैं ॥
जिस गौ को गौमाता कहकर
गाँधी सेवा करते थे
जिसके उर में सभी देवता
वास हमेशा करते थे
हिन्द भले ही मुक्त हुआ हो
गौमाता बेहाल अभी
कटती गऊएँ किसे पुकारें
उनके सर है काल अभी
गौमाता की शोणित-बूँदें
जब धरती पर गिरती हैं
तब आज़ादी की व्याख्याएँ
ज्यों आरी से चिरती हैं
गौ भारत का जीवन-धन है
हिन्दू चिन्तन की धारा
गौमाता को जो काटे, वह
है माता का हत्यारा
कृष्ण कन्हैया की गऊओं की
गाथा करुण सुनाते हैं
कया खोया है, क्या पाया है
आज तुम्हें बतलाते हैं ॥
हिन्द देश की भाषा हिन्दी
संविधान में माता है
मैकाले की अँग्रेजी से
भारत जाना जाता हैं
राजघाट से राजपाट तक
अँग्रेजी की धूम बड़ी
औ’ हिन्दी, झोपड़-पटटी में
कैसी है मजबूर खड़ी
न्यायालय से अस्पताल तक
भाषा अब अँग्रेजी है
हिन्दी संविधान में बन्दी
रानी अब अँग्रेजी है
मन्त्री जी से सन्त्री जी तक
बोलें सब अँग्रेजी में
हर काँलिज, हर विद्यालय में
डोंलें सब अँग्रेजी में
अपनी भाषा हिन्दी से हम
क्यों इतना कतराते हैं
क्या खोया है, क्या पाया है
आज तुम्हें बतलाते हैं॥
वंशवाद में नेतओं की
चालें बड़ी फरेबी है
माता कुर्सी पर बलिहारी
बेटे औरंगजेबी हैं
दूर विदेशों मे पढता अब
भारत भाग्य विधाता है
भारत की माटी से उसका
केवल कुर्सी नाता है
नेतागण कुर्सी-महिमा का
साँस लिए बिन पाठ करें
जनता भूखी, नेताज़ी के
कुत्ते, बिल्ली ठाठ करें
वंशवाद के मकड़जाल से
सिंहासन छुड़वाना है
भारत की इस पुण्य-भूमि पर
राम राज्य अब लाना है
नेताओं के हथकण्डों से
लोगो तुम्हें जगाते है
क्या खोया है, क्या पाया है
आज तुम्हें बतलाते हैं ॥
वर्ण-व्यवस्था भारत-भू पर
सदियों से चलती आई
जिसका जो भी काम है उसकी
जाति वही है कहलाई
जाने कब से इस समाज में
छुआ-छात की बू आई
इसी भूल ने भारत-भू को
भारी चोट है पहुँचाई
नेताओं ने आरक्षण से
सत्ता पर कब्जा पाया
समरसता को छोड़, घृणा से
आपस में है लड़वाया
सदियों से पुरखों की भूलें
आओं अब स्वीकार कर्रें
वंचित, शोषित भाई के सँग
शोषण का प्रतिकार करें
समरसता को आरक्षण का
मन्त्र तुम्हें समझाते है
क्या खोया है क्या पाया है
आज तुम्हे बतलाते है ॥
अफसर, नेता औ’ मंत्रीगण
भ्रष्ट आचरण करते है
स्विस बैंकों में जाकर सारे
माल लूट का भरते हैं
घोटालों की हवा चली है
आज विदुर के देश में
नहीं दीखता कोई परिवेश में
सविधान की झूठी कसमें
मक्कारी से खाते है
मेहनतकश जनता के धन से
नेता महल बनाते हैं
इनके घर में रोज़ दिवाली
गली गली में अँधियारा
सोने की चिड़िया को कैसे
घायल करके मारा है
‘भ्रष्टाचार मिटाओ’ का हम
पावन शंख बजाते हैं
क्या खोया है, क्या पाया है
आज तुम्हें बतलाते है ॥

लन्दन, अमरीकी महलों से
सुन्दर अपनी ही कुटिया है
विश्व गगन में उड़ने वाली
भारत सोने की चिड़िया है
अपनी धरती अपनी माटी
अपनी माँ तो माँ होती है
परदेशी झूठन के ऊपर
देशभक्ति हर दम रोती है
जो कुछ रुखा-सुखा हमको
अपने घर पर मिल जाएगा
उससे ही अपनी धरती पर
खूब ग़ुज़ारा हो जाएगा
अपने प्रतिभाशाली बेटे
अब परदेश नहीं जाएँगे
उनको जो कुछ भी पाना है
राष्ट्र देव से ही पाएँगे

घर घर हुए हिरण्याकश्यप
कैसे अब प्रहलाद बचेगा
दुष्ट होलिका हँसती हम पर
कौन होलिका-दहन करेगा
अग्नि परीक्षा प्रहलादों की
लेते अभी हिरण्याकश्यप
अग्नि परीक्षा सीताओं की
होगी कितनी और, परंतप
द्रोण ! अँगुठा एकलव्य को
कब तक और हारना होगा
कब तक राम भेजकर वन में
रावण हमें मारना होगा
कितनी पदमनियों के जौहर
हमको उअर दिखेंगे आखिर
और चिताओं पर विरों की
कब तक हाथ सिकेंगे आखिर
कदम-कदम पर अग्नि परीक्षा
कब तक यह इतिहास रचेगा
घर-घर हुए हिरण्याकश्यप
कैसे अब प्रहलाद बचेगा
आजादी हम जिसको कहते
आधी और अधूरी लगती
लोक व्यवस्था जिसको कहते
हमको वह मजबुरी लगती
कब तक घोड़ों और गधों में
हमें एक को चुनना होगा
कब तक अपनी इस हालत पर
हमकों यूँ सर धुनना होगा
जाति, भाषा औ’ धर्म, प्रान्त ही
हमको आज बड़े लगते हैं
सबसे बड़ा देश को मानें
देखो इतना कब जगते हैं
क्या भारत-माता की चीखें
हमको नही सुनाई देतीं
क्या दुश्मन की शकुनि-चालें
हमको नही दिखाई देती
राष्ट्र देवता के मन्दिर में
कब तक यूँ कोहराम मचेगा
घर-घर हुए हिरण्याकश्यप
कैसे अब प्रहलाद बचेगा
अपने घर की दीवारों को
हमने देश समझ रक्खा है
अपना घर खुश है तो हमने
खुश परिवेश समझ रक्खा है
दुष्ट पड़ोसी की नीयत को
क्यों हम जान नही पाते है
उग्रवाद जैसी चालों को
क्यों पह्चान नहीं पाते हैं
घर की ईंट बचाने को हम
राष्ट्र-भवन को ढहा रहे है
क्षुद्र स्वार्थ की नाली में हम
संस्कृति, गौरव बहा रहे है
भगत सिंह जैसे बालक हों
हमको यह स्वीकार नहीं है
वीर शिवा की गौरव-गाथा
अब शिक्षा का सार नहीं है
आचरणों में परिवर्तन का
भाव हमें क्या नहीं ज़ँचेगा
घर घर हुए हिरण्याकश्यप
कैसे अब प्रहलाद बचेगा
देश-भक्ति के रंगों से अब
होली हमें खेलनी होगी
काश्मीर की व्यथा और अब
हमको नही झेलनी होगी
रंग,अबीर, गुलाल नहीं अब
अपनी माटी हि चन्दन है
इस माटी का तिलक लगाकर
सबको होली अभिनन्दन है
कच्चे रंग अब नहीं चाहियें
पक्के रंगों की होली हो
देश प्रेम के मतवालों की
कदम-कदम अब टोली हो
जाति, भाषा औ’ मजहब की इन
दीवारों को तोड़ गिराओ
वैमनस्य की इस कीचड़ से
प्रेम-भाव के कमल खिलाओ
यही सुत्र अब नव-भारत में
एक नया इतिहास रचेगा
घर-घर हुए हिरण्याकश्यप
कैसे अब प्रहलाद बचेगा

अँग्रेजी सन को अपनाया
विक्रम संवत भुला दिया है
अपनी संस्कृति, अपना गौरव
हमने सब कुछ लुटा दया है॥
जनवरी-फरवरी अक्षर-अक्षर
बच्चों को हम रटवाते हैं
मास कौन से हैं संवत के
किस क्रम से आते-जाते हैं
व्रत, त्यौहार सभी अपने हम
संवत के अनुसार मनाते
पर जब संवतसर आता है
घर-आँगन क्यों नहीं सजाते
माना तन की पराधीनता
की बेड़ी तो टूट गई है
भारत के मन की आज़ादी
लेकिन पीछे छूट गई है
सत्य सनातन पुरखों वाला
वैज्ञानिक संवत अपना है
क्यों ढोते हम अँग्रेजी को
जो दुष्फलदाई सपना है
अपने आँगन की तुलसी को,
अपने हाथों जला दिया है
अपनी संस्कृति,अपना गौरव,
हमने सब कुछ लुटा दिया है ॥
सर्वश्रेष्ठ है संवत अपना
हमको इसका ज्ञान नहीं हैं
पूर्ण प्रमाणिक गणना इसकी
हमको इसका ध्यान नहीं हैं
संवत के दिन ब्रह्माजी ने
इस वसुधा को जन्म दिया था
अवध के सिंहासन पर प्रभु का
सबने मिलकर तिलक किया था
आर्य समाजी गौरव की भी
नींव यहीं संवत का दिन है
हेडगेवार औ’ झूले लाल की
जन्म-तिथि संवत का दिन है
नवसंवतसर के पहले दिन
शुभ नव्रात्रि आगमन होता
दुर्गा-पूजा, शक्ति-अर्चना
में तन-मन-धन अर्पण होता
पश्चिम के वैभव के आगे,
क्यों हमने सर झुका दिया है ?
अपनी संस्कृति अपना गौरव,
हमने सब कुछ लुटा दिया है ॥

महावीर की वाणी से हम,
नवयुग का निर्माण करेंगे
उनके पदचिन्हों पर चलकर,
धरती का कल्याण करेंगे ॥

मन्त्र अहिंसा, महावीर का
गाँधी जी ने अपनाया था
इसी मन्त्र के चमत्कार से
भारत दुनिया पर छाया था

अँग्रेज़ों की इक-इक गोली
सत्याग्रह से शर्मिंदा थी
हिंसा यूँ मर गई सदा को
और अहिंसा ही ज़िन्दा थी

तोप, टैंक बौने लगते थे
हर आयुध बेकार हो गया
धर्म, अहिंसा, मानवता का
हर सपना साकार हो गया

अँग्रेजी सिंहासन आखिर
इसके आगे डोल गया था
भारत माँ की आज़ादी का
द्वार सदा को खोल गया था

विश्व-शांति के लिए आज हम,
दुनिया में अभियान करेंगे
महावीर की वाणी से हम,
नवयुग का निर्माण करेंगे ॥

‘सत्यमेव जयते’ भारत का
मूल मन्त्र हमने माना है
है आदर्श यही भारत का
इस पर ही चलते जाना है

न्यायालय से राजपाट तक
सत्य-धर्म की महिमा गाते
वीर प्रभु के उपदेशों का
चमत्कार भारत में पाते

धूर्त, फ़रेबी, अत्याचारी
शासन हमको यह लगता है
लेकिन बड़ों-बड़ों के ऊपर
चाबुक सत्य सदा चलता है

सत्य साधना बेशक मुश्किल
लेकिन इससे क्या घबराना
सत्य सदा ही अटल रहेगा
सत्य राह पर चलते जाना

महावीर के इसी मंत्र का,
घर-घर में गुणगान करेंगे
महावीर की वाणी से हम,
नवयुग का निर्माण करेंगे ॥

जितना,जो हमको मिलता है
उतना ही स्वीकार करेंगे
और किसी के अधिकारों पर
कभी नही अधिकार करेंगे

चोरी, जुआ, लुट, अपहरण
क्षणिक सुखद तो हो सकते हैं
लेकिन पाप-बन्ध के कारण
जन्मों के सुख खो सकते हैं

जूए की चौसर के कारण
कौरव-पाण्डव युध्द हुआ था
सीता को अपह्र्त करने पर
भाग्य असुर पर क्रुध्द हुआ था

धर्म-अचौर्य, महावीर का
नारा बनकर सदा बुलेगा
इसी मन्त्र की चाबी द्वारा
द्वार सत्य का नित्य खुलेगा

चोरी, जुआ छोड़ सदा को,
नवजीवन पर ध्यान करेंगे
महावीर की वाणी से हम,
नवयुग का निर्माण करेंगे ॥

क्षणिक सुखों के कारण हमने
अपना जीवन शाप किया है
विषय वासनाओं मे पडकर
हमने कितना पाप किया है

वंश चलाने की सीमा तक
भोग कामना जो रखते हैं
गृहस्थ-धर्म में रह्कर भी वे
ब्रह्मचर्य का फल चखते हैं

फ़ैली एक नई बीमारी
एड्स रोग जिसको कहते हैं
भोगवाद में डूबे मानव
जीवित ही मृत्यु सहते हैं

महावीर का दर्शन ‘संयम’
दुनिया अब स्वीकार करेगी
ब्रह्मचर्य-जीवन जीने से
हमको नई बहार मिलेगी

भोगवाद पर जीवन-सुख को
और नहीं क़ुर्बान करेंगे
महावीर की वाणी से हम,
नवयुग का निर्माण करेंगे ॥

नई सदी

लोकतन्त्र का चेहरा कलुषित,
नेता भ्रष्टाचारी है
हम इन धृतराष्ट्रों को ढोएँ,
ऐसी क्या लाचारी है ?

सिंहासन कब तक झेलेगा
लंगड़े-लूले शासक को
आओ मिलकर सबक़ सिखा दें
हर शोषक, हर त्रासक को

रामराज्य के झूठे नारे
आसमान में गूँज रहे
हंसों को बनवास दिलाकर
हम कागों को पूज रहे

गाँधी, नेहरू के चित्रों से
शोभित इनके बँगले हैं
लेकिन उनके आदर्शों पर
निश-दिन इनके हमले हैं

आज विश्व में भारत-भू पर
संकट बेहद भारी है
नई सदी में पग धरने की यह
कैसी तैयारी है ?

तुमने तो अपने शासन में
बाँर्डर सारे खोल दिए
भारतवासी और विदेशी
एक तुला पर तोल दिए
पश्चिम के आर्कषण में तुम
अपनी संस्कृति भूल गए
अपनी हालत भूल, विदेशी
रंगरलियों में झूल गए

नेताओ! भारत ने तुमसे
बाँधी थीं कुछ आशाएँ
भूल गए तुम गाँधी-चिन्तन
औ’ उसकी परिभाषाएँ

शिक्षा अपने बच्चों को तुम
दिलवाते हो फाँरन में
अब तुम अपने कपड़े तक भी
सिलवाते हो फाँरन में

फाँरन के तलुए सहलाने
की तुमको बीमारी है
रिश्तेदारी तक फाँरन से
होती आज तुम्हारी है ॥

रोग कौन सा है जिसका अब
भारत में उपचार नही
मेडीकल-दुनिया में भारत
सक्षम है लाचार नही

अस्पताल में दवा नही है
इंजेक्शन का नाम नही
रामभरोसे हैं सब रोगी
कुछ इलाज का काम नही

इस कारण ही धन्वन्तरी-सुत
अपनी धरती छोड रहे
और डाक्टर फाँरन जाकर
अपना नाता जोड़ रहे

अपनी जन्म-भूमि पर ही अब
योग्य चिकित्सक भारी है
प्रतिभाओं की क़्द्र नही है
शासन की बलिहारी है ॥

यह कैसा सूरज निकला जो
चारों ओर अँधेरा है
कहीं-कहीं पर थोड़ा-थोड़ा
उज्ज्वलता का घेरा है

गाड़ी, बँगला, ऊँची कोठी
आसमान को मात करे
और कहीं रोटी की ख़ातिर
बचपन ख़ुद से घात करे

रोटी, कपड़ा, सर पर छप्पर
अगर सभी के पास नही
तो शासन के आश्वासन पर
हमें ज़रा विश्वास नही

सिर्फ़ योजनाएँ बनती हैं
होता कुछ उत्थान नहीं
मन्त्री, नेता, अफ़सर में अब
शेष रहा ईमान नहीं

राष्ट्र-प्रेम औ’ राष्ट्र-दोह की
जंग देश में जारी है
किसको विजय मिलेगी देखें
युद्ध बड़ा ही भारी है ॥

हिन्दी

जैसे अँग्रेज़ी ही सब कुछ
इसके बिना नही कुछ जैसे
रूस, चीन, जापान, जर्मनी
फिर सबसे आगे हैं कैसे ?

छोटे-छोटे देश गर्व से
अपनी भाषा बोल रहे हैं
एक अभागे हम हैं ऐसे
हिन्दी को कम तोल रहे हैं

सौ करोड़ की इस भाषा का
दुनिया कब सम्मान करेगी
कब भारत की गली-गली से
अँग्रेज़ी प्रस्थान करेगी

हम अँग्रेज़ी को तज देंगे
आओ यह सकल्प उठाएँ
हिन्द निवासी, हिन्दी वालो
आओ हिन्दी को अपनाएँ

हस्ताक्षर तक हम करते हैं
एक विदेशी भाषा में
माना हम आज़ाद हो गए
लेकिन किस परिभाषा में ?

जन्म-दिवस पर केक काट कर
गाते हम अँग्रेज़ी में
शादी-ब्याह तलक की चिट्ठी
छपवाते अँग्रेज़ी में

घोड़ी डोली के स्वागत को
बैण्ड बजा अँग्रेज़ी में
टाई कस कर हर बाराती
ख़ूब सजा अँग्रेज़ी में

सड़को पर हम नाच रहे हैं,
जाने किस प्रत्याशा में ?
माना हम आज़ाद हो गए
लेकिन किस परिभाषा में ?

खेलों के विवरण सुनते हैं
दिनभर हम अँग्रेज़ी में
देश हुआ क़ुर्बान किक्रेट पर
कितना दम अँग्रेज़ी में

टेलीविजन की फुडहता को
पाते हम अँग्रेज़ी में
दूरदेश के चैनल हमको
ललचाते अँग्रेज़ी में

स्वाभिमान कैसे जागेगा,
ऐसी घोर निराशा में ?
माना हम आज़ाद हो गए
लेकिन किस परिभाषा में ?

संविधान-निर्माताओं का
संविधान अँग्रेज़ी में
देश की संसद मे होते सब
समाधान अँग्रेज़ी में

न्यायालय के निर्णय सारे
होते हैं अँग्रेज़ी में
प्रैस सभा में नेता अपने
रोते हैं अँग्रेज़ी में

बच्चों पर अँग्रेज़ी लादी
हमने किस अभिलाषा में ?
माना हम आज़ाद हो गए
लेकिन किस परिभाषा में ?

अणु-शक्ति के सन्धानों में
भारत की ख़ुद्दारी है
अपने दम-ख़म, अपने बल पर,
जीने की तैयारी है

पास-पड़ौसी जब देखो तब
आँख दिखाने लगते हैं
भाड़े के हथियार उठाकर
रौब जमाने लगते हैं

शान्ति-सुलह का अभिनय करते
सीमा में घुस आते हैं
सन्धि-वार्ता का धोखा दे
हमले करते जाते हैं

सहनशीलता की भी मित्रो !
इक निश्चित हद होती है
हद से ज़्यादा सहन करो तो
दुनिया मे भद होती है

दुश्मन सर पर चढ़ आए तो
ज़ाहिर है लड़ना होगा
हमको दुश्मन के नहले पर
दहला अब जड़ना होगा

इंच-इंच धरती भारत की,
प्राणों से भी प्यारी है
अणु-शक्ति के सन्धानों में
भारत की ख़ुद्दारी है ॥
महावीर, गौतम के वंशज
गाँधी के हम अनुयायी
सत्य, अहिंसा, विश्व-शान्ति की
संस्कृति हमने ही पायी

नहीं किसी की सीमाओं में
हमने अपना पाँव रखा
मानवता है धर्म हमारा
हमने सबको कहा सखा

शिवशंकर बनकर धरती का
हमने सारा ज़हर पिया
नेत्र तीसरा मत खुलवाना
दुश्मन को सन्देश दिया

भारत है अवतार शक्ति का
दुनिया को यह भान हुआ
‘अणु-शक्ति है दुष्ट-दलन को’
कहने का सम्मान हुआ

स्वाभिमान से सर ऊँचाकर,
जीना शर्त हमारी है
अणु-शक्ति के सन्धानों में
भारत की ख़ुद्दारी है ॥

अभिनन्दन, अपने वीरों का
जय तेरी भारत सरकार
जय हो भारत के वैज्ञानिक
पाया तुमने सबका प्यार

जय हो भारत, तेरी जय हो
गूँज उठा नीला आकाश
पाँच धमाकों से भारत में
जाग गया नूतन विश्वास

धन्य-धन्य धरती राणा की
धन्य पोखरण तेरी धूल
पास-पड़ौसी सावधान हों
माफ़ नहीं होगी अब भूल

‘दादाओं’ की दादागीरी
अब हमको स्वीकार नही
अपने गौरव की रक्षा का
क्या हमको अधिकार नही ?

अपने भारत की रक्षा की
हम पर ज़िम्मेदारी है
अणु-शक्ति के सन्धानों में
भारत की ख़ुद्दारी है ॥

कश्मीर

बिक सकते हैं कुर्सी वाले
लेकिन देश तुम्हारा है
मत छोड़ो कश्मीर साथियो
माँ ने तुम्हे पुकारा है ॥

कल पुरखों ने दी क़ुर्बानी
शीश चढ़ाए माटी पर
आज हमे भी चलना होगा
बलिदानी परिपाटी पर

आओ मिलकर बलिदानों की
परम्परा की लाज रखें
रक्त चाहिए मातृ-भूमि को
उसकी इच्छा आज रखें

भारत माता की रक्षा का
दृढ़ संकल्प हमारा है
मत छोड़ो कश्मीर साथियो
माँ ने तुम्हे पुकारा है ॥

भारत-माँ के अमर लाड़ले
देश प्रेम के मतवाले
घाटी की रक्षा में सबने
तन-मन-धन सब दे डाले

तीन सौ सत्तर की धारा का
जाल बिछाया कुर्सी ने
दो विधान औ’ दो प्रधान का
क़िस्सा गाया कुर्सी ने

धारा तीन सौ सत्तर का यह
कैसा अजब नज़ारा है
मत छोड़ो कश्मीर साथियो
माँ ने तुम्हे पुकारा है ॥

वोट बैंक की कुटिल चाल ने
घाटी का अपमान किया
चाँद सितारों वाला झण्डा
लाल चौक पर तान दिया

अमर तिरंगा ले जब हमनें
घाटी को प्रस्थान किया
तब हिन्दुस्तानी परचम का
दुनिया ने गुणगान किया

घाटी में फिर से जयहिन्द का
गूँज उठा अब नारा है
मत छोड़ो कश्मीर साथियो
माँ ने तुम्हे पुकारा है ॥

अपनी काली करतूतों से
मिट जाएगा पाकिस्तान
रावलपिन्डी से आगे तक
फिर से होगा हिन्दुस्तान

भारत माता का कन्धा है
जिस पर पापी बैठा है
तुझपे तेरा अपना क्या है
जिस पर इतना ऐंठा है
मार पड़ेगी अबकी इतनी
घर-घर होगा क़ब्रिस्तान

पैंसठ और इकहत्तर को तू
शायद बिल्कुल भूल गया
भीख में कुछ हथियार मिले तो
तू ज़्यादा ही फूल गया
करगिल में इस गद्दारी का,
ब्याज़ सहित भुगता भुगतान

हमने अपनी नई सोच से
नव-इतिहास बनाया था
इन्द्रप्रस्थ-लाहौर जोड़कर
मैत्री-हाथ बढ़ाया थ
न्यौछावर हैं प्राण मित्र पर
दुश्मन के हम लेते प्राण

करगिल के दुश्मन तुझको हम
क़ब्रों में दफ़ना देंगें
विजय पताका भारत-भू की
हम तुझ पर फहरा देंगें
दुनिया भर में गूँज रहा है
भारत-माता का जयगान

प्राण लगाकर जिन वीरों ने
दुश्मन को ललकारा है
उनके बलिदानों के आगे
झुकता शीश हमारा है
भारत-माता की गोदी में
फिर से आना वीर जवान

संकल्प

‘पृथ्वी’-परीक्षण किया जो हमने
तुमने ‘गौरी’ लिया उधार
पाँच धमाकों को सुनकर तो
पड़ गई तुम पर भारी मार

भारत अपने बल-बूते है
तुम इमदाद करो स्वीकार
रोटी तक का दाँव लगाकर
माँगो तुम सबसे हथियार

करगिल-काश्मीर में तुमने
करवाया जो नर-संहार
थू-थू की तुम पर दुनिया ने
सबने दिया तुम्हें दुत्कार

जब-जब छेड़ा तुमने हमको
हमने तुम्हें लगाई मार
अब जो युद्ध हुआ तो होगा
रावलपिन्डी पर अधिकार

भारत-भू पर देश भक्ति की
कैसी अलख जगाई है
भारत-माँ के बेटो तुमको
सौ-सौ बार बधाई है ॥

परम शक्ति है पास हमारे
हमने यह दिखलाया है
औ’ कम्प्यूटर में भी हमने
भारी नाम कमाया है

सी टी बी टी वालों को भी
हमने ही धमकाया है
भारत के गौरव का झण्डा
दुनिया पर फहराया है

हिन्दुस्तानी वैज्ञानिक ने
कैसी धूम मचाई है
भारत-माँ के बेटो तुमको
सौ-सौ बार बधाई है ॥

राष्ट्र संघ के दिव्य मंच पर
हिन्दी ज्योति जगाई है
और विदेशी चैनल पर भी
देखो हिन्दी छाई है

संस्कृत भाषा को भारत में
फिर मज़बूत बनाया है
संस्कृत वर्ष मनाकर हमने
ॠषियों का गुण गाया है

देखो नवयुग में भारत ने
कैसी ली अँगडाई है
भारत-माँ के बेटो तुमको
सौ-सौ बार बधाई है ॥

दुनिया भर के प्रतिबन्धों को
हमने धूल चटाई है
लक्ष्मी माता ने भारत पर
कृपा-दृष्टि बरसाई है

हमने शेयर बाज़ारों की
क़िस्मत को भी बदला है
अर्थ जगत के दादाओं के
हमलों को भी कुचला है

कृषि-बीमा से खलिहानों ने
नई रोशनी पाई है
भारत-माँ के बेटो तुमको
सौ-सौ बार बधाई है ॥

करगिल में कायर दुश्मन ने
अपनी पीठ दिखाई है
हिन्दुस्तानी बलिदानों से
धरती भी थर्राई है

राष्ट्र-प्रेम के इस मंज़र से
देखो कण-कण जाग उठा
घुसपैठी अपने साथी की
लाश छोड़कर भाग उठा

पाकिस्तानी ग़द्दारों ने
फिर से मुँह की खाई है
भारत-माँ के बेटो तुमको
सौ-सौ बार बधाई है ॥

बाबा साहब भीम राव जी
संविधान-निर्माता थे
हरिजन्, गिरिजन, दलितजनों के
सच्चे भाग्य विधाता थे

भारत जैसा लोकतन्त्र कब
इस दुनिया में दूजा है
बाबा साहब ने इसको ही
इष्ट बनाकर पूजा है

आओ उनके आदर्शों का
मिलकर हम सम्मान करें
ऊँच-नीच का भेद मिटाकर
भारत का निर्माण करें

अग्र-शिरोमणि अग्रसैन ने
अग्रोहा निर्माण किया था
एक रूपैया, एक ईंट से
नवयुग का आह्वान किया था

अपने पावन दिव्य-तेज से
कैसा सुन्दर बाग़ लगाया
महक रहा है सारा भारत
पाकर जिसकी अनुपम छाया

दान, दया, करूणा के सागर
हे भारत के भाग्य-विधाता
युगों युगों से गुँज रही है
तेरे पुत्रों की यश गाथा

हे महाराजा अग्रसैन जी
अभिनन्दन स्वीकार कीजिए
जीत सकें हम जन मानस को
हमको यह वरदान दीजिए

आज़ादी

क्या क़ीमत है आज़ादी की
हमने कब यह जाना है
अधिकारों की ही चिन्ता है
फर्ज़ कहाँ पहचाना है

आज़ादी का अर्थ हो गया
अब केवल घोटाला है
हमने आज़ादी का मतलब
भ्रष्टाचार निकाला है

आज़ादी में खा जाते हम
पशुओं तक के चारे अब
‘हर्षद’ और ‘हवाला’ हमको
आज़ादी से प्यारे अब

आज़ादी के खेल को खेलो
फ़िक्सिंग वाले बल्लों से
हार के बदले धन पाओगे
‘सटटेबाज़ों’ दल्लों से

आज़ादी में वैमनस्य के
पहलु ख़ूब उभारो तुम
आज़ादी इसको कहते हैं?
अपनों को ही मारो तुम
आज़ादी का मतलब अब तो
द्वेष, घृणा फैलाना है ॥

आज़ादी में काश्मीर की
घाटी पूरी घायल है
लेकिन भारत का हर नेता
शान्ति-सुलह का कायल है
आज़ादी में लाल चौक पर
झण्डे फाड़े जाते हैं
आज़ादी में माँ के तन पर
चाक़ू गाड़े जाते है

आज़ादी में आज हमारा
राष्ट्र गान शर्मिन्दा है
आज़ादी में माँ को गाली
देने वाला ज़ीन्दा है

आज़ादी मे धवल हिमालय
हमने काला कर डाला
आज़ादी मे माँ का आँचल
हमने दुख से भर डाला

आज़ादी में कठमुल्लों को
शीश झुकाया जाता है
आज़ादी मे देश-द्रोह का
पर्व मनाया जाता है

आज़ादी में निज गौरव को
कितना और भुलाना है ?

देखो! आज़ादी का मतलब
हिन्दुस्तान हमारा है
आज़ादी पर मर मिट जाना
एक अरब को प्यारा है

मित्रो! आज़ादी का मतलब
निर्भय भारत-माता है
आज़ादी का अर्थ दूसरा
भारत भाग्य-विधाता है

प्यारो! आज़ादी का मतलब
अमर तिरंगा झण्डा है
आज़ादी दुश्मन के सर पर
लहराता इक डण्डा है

आज़ादी से अपने घर में
नई रौशनी आई है
आज़ादी पाकर भारत ने
जग में धूम मचाई है

आज़ादी की ख़ातिर हमने
कितने ही बलिदान दिए
आज़ादी पाने को जाने
कितनों ने ही प्राण दिए

आज़ादी ने संविधान का
हमको पाठ पढ़ाया है
आज़ादी में हमने पावन
लोकतन्त्र को पाया है

आज़ादी के संकल्पों को
हमने मन मे ठाना है ॥

निगम पार्षद नोट कमाता
एम एल ए विश्वास गँवाता
सांसद अपना शर्मिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥

व्यवसायी हर टैक्स बचाता
अध्यापक ट्यूशन की खाता
पत्रकार इक कारिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥

डाँक्टर भारी लूट मचाता
अभियन्ता अभियान चलाता
बेघर हर इक बाशिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥

है किसान क़िस्मत का मारा
नेताओं में बँटता चारा
रिश्वतख़ोरी ताबिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥

ख़ूब निभाया नेताओं ने भाई चारा है
इन्हें विदेशी भाई चारा बेहद प्यारा है
सन् बासठ में हिन्दी-चीनी भाई चारा था
‘हिन्दी-चीनी भाई-भाई’ गूँजा नारा था
चाओ, माओ भाई-भाई कहते चढ आए
चुपके चुपके भारत की सरहद में बढ आए
और हज़ारों वर्गमील धरती को दाब लिया
तिब्बत को तो पूरे का पूरा ही चाब लिया
विश्व शान्ति का दूत झुकाए सर बेचारा है ॥
बंग्लादेशी भाई चारे को भी जान लिया
बीघा तीन हामारा, उसने अपना मान लिया
जीता ढाका हम भाई चारे में ह्हार गए
भाई बनकर बंग्लादेशी बाज़ी मार गए
चकमा देकर भारत भर में ‘चकमा’ रोप दिए
अपने गुंडे, चोर उचक्के हम पर थोप दिए
ऐसे दुष्टों का तो बस डण्डा हीइ चारा है ॥
नेताओं का भाई चारा जनता मान गई
इनक्के भाई चारे में जनता की जान गई
देश भक्ति, भाई चारे कीइ जमकर बातें है
कुर्सी के चक्कर में नेताओं की घातें है
शेयर, चीनी, घोटालों की बातें हैं छोटी
और ‘हवालों’ ने छीनी है जनता की रोटी
भ्रष्टाचारी नेताओं से भारत हारा है ॥

विश्व जीतने वाला घोड़ा हमने ही तो छोड़ा है
परमाणु से हमने जग को मैत्री युग से जोड़ा है

अमेरिका भी हमको अपने घर पर आज बुलाता है
रुस हमारे घर पर आकर समझौता कर जाता है
अप्ने डाँक्टर वैज्ञानिक तो दुनिया भर में छाये हैं
कम्प्यूटर में हमने जग के कीर्तिमान बनाये हैं

विश्व जीत कर जिस दिन भारतवासी घर पर आएँगे
अश्व मेध तब पूर होगा गीत ख़ुशी के गाएँगे
उस दिन अपने भारत भू पर नई दिवाली आयेगी
उस दिन भारत माता जग में वन्दनीय कहलायेगी

मैं उस दिन की इंतज़ार में दीपक रोज़ जलाता हूँ
कब आएँगे राम लौट कर, घर-घर अलख जगाता हूँ
राम लखन हो तुम भारत के जग को ये बतलाना है
भारत के गौरव का झण्डा दुनिया पर लहराना है

जो प्रतिबन्ध लगाते थे, वो मैत्री आज जताते हैं
शक्तिशाली ही तो इस जग में हरदम पूजे जाते हैं
हम भारत के वासी जिन देवों को शीश झुकाते हैं
उनके हाथों शक्तिशाली ही शस्त्र उठाए जाते हैं
इस जग के निर्माता विष्णु का चक्र सुदर्शनधारी है
महादेव के हाथों में त्रिशूल शोभता भारी है
रामधनुर्धारी हैं जिनको सागर शीश झुकाता है
अर्जुन भी गांडीव उठाकर कुरूक्षेत्र में जाअत है

शक्ति स्वरुपा मां दुर्गा को घर घर पूजा जाता है
बाल भरत भी खेल खेल में सिंह-दन्त गिन जाता है
यहाँ अब्दुल कलाम हमारा परमाणु का ज्ञाता है
जिसके धूम धड़ाकों से यह जग हमसे थर्राता है

हमने जग के दादाओं को शक्तिसुत्र समझाना है
भारत के गौरव का झण्डा दुनिया पर लहराना है
हम दुनिया से बात करेंगे यू0 एन0 ओ0 के मंचो से
हमको कोई भय नहीं लगता दुनिया के इन पंचो से

सी टी बी टी पर हस्ताक्षर हम कैसे कर सकते है
दुनिया के दादाओं तुमसे हम कैसे डार सकते है
सी टी बी टी वालो हमको पक्षपात स्वीकार नहीं
तुम एटम रख सकते हो तो हमको क्यों अधिकार नहीं

प्यार मुहब्बत के समझौते ख़ुद्दारी से होते हैं
वरना इन समझौंतों पर तो कायर जमकर रोते हैं
अमरीका की संसद कहती सी टी बी टी धोका है
आओ मन से मन को जोड़ें ये ही सच्चा मौका है

अगर सभी के मन में धरती माता का सम्मान नहीं
सी टी बी टी इक छलना है यह कोई वरदान नहीं
हमको ऐसे समझौतों से अपना देश बचाना है
भारत के गौरव का झण्डा दुनिया पर लहराना है

भारती के भाल का सम्मान वन्देमातरम्
देश हित की भावना का मान वन्देमातरम्

जब कभी भी इस धरा पर कोई संकट आ पड़े
मंत्र सम है गूँजता वरदान वन्देमातरम्

भिन्न भाषा, भिन्न भूषा, भिन्न इसकि बोलियाँ
भिन्नता में एकता पहचान वन्देमातरम्

इस गगन में अब लहरता राष्ट्र का झण्डा अमर
इस तिरंगे की अमिट है शान वन्देमातरम्

अब करोड़ों हाथ अपने राष्ट्र को महकाएँगे
है हमारे भाग्य का भगवान वन्देमातरम्

पूजा करो सभी की, लेकिन
प्रथम देवता देश को मानो
देश बड़ा है सब धर्मों से
इस सच्चाई को पहचानो

अपने नेता ज़ोर-ज़ोर से
मन्दिर-मस्जिद चिल्लाते हैं
इन नारों के दम पर ही तो
ये संसद में आ पाते हैं

मन्दिर वाले वोट मिलेंगे
जाति-वाद के अंगारों से
मस्ज़िद वाले वोट मिलेंगे
हिन्दू-मुस्लिम दीवारों से

देश-प्रेम कैसा, जब नेता
कुर्सी पर जाएँ बलिहारी
तुझको फिर से आना होगा
भारत-भू पर कृष्ण मुरारी

पोखरण में
परमाणु के विस्फोट करने वाला
एक कुंवारा
जो विज्ञान को ही
स्वपन सुंदरी मानकर
प्यार करता रहा
अपने आविष्कारों पर ही मरता रहा
हेयर कटिंग सेलून
जाने से भी डरता रहा
जो जवानी में पति ना
बनने के लिये तन गया
वह बुढ़ापे में
राष्ट्रपति बन गया
और जाते जाते कैसी
परम्परा जोड़ गया
खुद पुनः शिक्षक
तथा हिन्दुस्तान को
शिक्षा देने के लिये
एक महिला को
राष्ट्रपति भवन
छोड़ गया
विधि का खेल निराला है
भाग्य बड़ा बलवाला है
क्या कर लेगा एन डी ए
यू पी ए रखवाला है
पर आम व्यक्ति
इस घटना से परेशान है
क्योंकि चहुंओर महिलाओं
का ही गुणगाण है
घर की राष्ट्रपति महिला
आफिस की राष्ट्रपति महिला
एक देश बचा था, वहां भी
पुरूषों की हार है, क्योंकि
अब उस पद पर भी
महिला ही सवार है
हमने सोनिया जी से पूछा
महिला शक्ति के लिये आप वरदान हैं
माना कि आप महान हैं परन्तु
महिलाओं के प्रति आपका दृष्टिभेद
हम समझ नहीं पाते
प्रतिभा ताई को राष्ट्रपति बनाया
तो कम से कम किरण बेदी को
दिल्ली का हवलदार तो बनाते
मेरे प्रश्न के उत्तर में
सोनिया जी मुस्कुराई तो
हमने अपनी कलम उठाई और लिखा -
यू पी ए आकाश देखिये दस जनपथ
पी एम का आवास देखिये दस जनपथ
कैसा शक्ति केन्द्र बना है भारत में
राष्ट्रपति निवास देखिये दस जनपथ

टैंशन, टैंशन, टैंशन
बास की टैंशन
लास की टैंशन
राशन की टैंशन
टयूशन की टैंशन
बीबी की टैंशन
बच्चों की टैंशन
पडोसी की टैंशन
मौसी की टैंशन
बिल की टैंशन
दिल की टैंशन
हेल्थ की टैंशन
वेल्थ की टैंशन
अगर रहेगी टैंशन तो
बीबी खायेगी पैंशन
टैंशन फ्री आन्दोलन अपनाओ
कम खर्चे में काम चलाओ
पडोसी की खुशहाली देख मुस्कराओं
बाबा रामदेव के योग शिविर में जाओ
टैंशन फ्री पत्रिका घर मंगवाओ
जोर जोर से गाना गाओ
कि जग में ऊंची होगी शान
तनावमुक्त हो हिन्दुस्तान

वैश्वीकरण छा रहा है
डायना की मौत से ये समझ आ रहा है
जर्मनी की कार में
अंग्रेजों की रानी
इजेपेटियन बाय फ्रेंड
डच ड्राईवर तथा
फ्रांस के मोड़ से टकराना
इसे कहते है
ग्लोबलाईजेशन का जमाना

धोती बांधने के आग्रह पर
केरल के मंदिर में
नेहरू जी द्वारा
आग बबूला हो जाना
और निज़ामुद्दीन की दरगाह पर
प्रसन्नता पूर्वक टोपी लगाना
इसी का नाम है
धर्मनिरपेक्षता निभाना

हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाई
एक ट्रक पर सवार
कर रहे थे तिरंगे झण्डे पर विचार
हिन्दु ने कहा -
हम हैं गाँधी के बेटे लायक
अहिंसा के नायक
वन्देमातरम् के गायक
छोड़ चुके हैं केसर की घाटी
क्योंकि हमको प्यारी है भारत की माटी
हम हैं भारत पर कुरबान
इसलिये ये रंग केसरिया हमारी शान।
मुस्लिम ने कहा -
हरा यानी हरियाली
हरियाली है तो खुशहाली
खुशहाली है तो चार-चार घरवाली
और तुम्हारी तरह एक या दो नहीं
एक दर्जन बच्चे पालने से भी नहीं डरते हैं
इसलिये हम इस हरे रंग पर मरते हैं
ये हरा रंग हमारी स्मृद्धि का सितारा है
इसलिये हमको प्यारा है।
ईसाई ने कहा -
सफेद यानी शांति
शांति है तो भाईचारा
इसलिये हम
भाइयों को चारा डालकर
ईसाई बना रहे हैं
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारों पर
सफेद झण्डा लहरा रहे हैं और
जिस दिन भारत के कोने-कोने में
ईसायत का झण्डा लहरायेगा
उस दिन ईसामसीह भारत में जरूर आयेगा
ईसामसीह को दीजिये सम्मान
और करिये तिरंगे को प्रणाम।
सरदार जी बोले -
जो बोले सो निहाल
सब कहो सत श्री अकाल
और बताओ
पहले मुर्गी आई थी या अन्डा
तो क्या कर लेगा तुम्हारा झन्डा
झन्डे में डन्डे की शान निराली है और
इस डन्डे से ही भारत की रखवाली है
तो हम हैं
भारत के चौकीदार
पंच प्यारों के अवतार
देश की रक्षा हमारा नारा है
इसलिये ये डन्डा हमको प्यारा है
इन चारो की बात को सुनकर
ट्रक ड्राईवर को गुस्सा आया
जोर का ब्रेक लगाया और कहा -
झन्डा-डन्डा तो ठीक
अशोक का चक्का भूल गये
अपने-अपने मजहब पर ही फूल गये और
मुझे तो लगता है
ये अशोक का नहीं
मेरे अशोका ट्रक का चक्का है
और ये हम ड्राईवरों की पहचान का पक्का है
और तुम चारों भी
भारत के इस ट्रक के
पहिये बन जाओ और
इस ट्रक में पंचर करने के बजाय
मिलकर कदम बढ़ाओ
तो ये ट्रक नहीं
भारत के विकास का रथ बन जायेगा
और इस पर सवार भारत
भारत नहीं
विश्वगुरू कहलायेगा॥
बहुत ठंड थी उस रात
पिताजी आये मेरे पास और बोले
ले बेटा देख ये चित्र
चुन लिया है हमने तेरा जीवन मित्र
मै चौका, पिता ने टोका
लाखें में एक है।
यूं तो अपने पिता पर पूर्ण विश्वास था
पापी मन लाचार था
सोचते विचारते पहुंचे उसके द्वार
शायद उसको भी था इन्तजार
हाथ मे चाय की ट्रे उठाये
शर्माये सकुचाये
दो सखियों के साथ
धीरे धीरे कदमों को बढाये
कमरे में आते ही कहा
नमस्कार।
हमने पूछा क्या आप ही हैं उम्मीदवार
उम्मीदवार? उम्मीदवार नही वोटर हैं
उम्मीदवार तो हैं आप
उम्मीदवार ही तो वोटर के घर आता है
वोटर को रिझाता है
ठीक है ! ठीक है ! वोटर जी
क्या ये दोनो सखिया भी
वोट डालने आई हैं
नही नही ये तो आलरेडी हो चुकी पराई हैं
लगता है पॉलटिकल साईंस का
आपको अधिक ज्ञान है
पॉलटिक्स में तो हम सब महान है
भाई पार्षद
पिता विधायक और
बाबा संसद की सीढ़ी चढे हैं
पॉलटिक्स तो हम
अपने घर पर ही पढ़े हैं
वैसे कहाँ तक की है पढाई?
जी बी ए किया हैं
किस सब्जेक्ट में?
सबजेक्ट नही ओबेजेक्ट पूछिये?
डिगरी लेने
किस कॉलेज से ?
कॉलेज से नही किताबों से
कॉलेज तो कभी कभी जाते थे
पिकनिक मनाने।
लगता पिकनिक आपकी हॉबी है
हाँ हाँ भारत तो क्या
अमरीका, चीन, जापान
पूरी दुनिया का चक्कर लगाया है
तब तो भूगोल का आपको अच्छा ज्ञान होगा
क्यों नही क्यों नही
वहाँ भी तो हमने एक सप्ताह बिताया है
हमने सखियों से पूछा
क्या आप भी भूगोल जाकर आई हैं?
नही नही हमने तो भूगोल में ही डिग्री पाई है।
सखियों से बात करना
उनको नही सुहाया
हमको समझाया
वोटर ये नही हम हैं
सवाल हमसे कीजीये
हमने कहा लीजीये
टी वी देखा है
टी वी तो मेरे जीवन का सहारा है और
”मुजरिम हॉजिर है” सीरीयल
मुझे सबसे प्यारा है।
इतना सुनते ही
मै स्वयं को टी वी सीरीयल मे ले आया
उसको जज और
अपने आप को मुजरिम पाया
ठक ठक की आवाज के साथ
उसने घोषणा की
कहाँ थे आप?
इक्कीस वर्ष तक खोजा है
अब ना कोई धोखा है
उसने कलम उठाई और
दे दिया हमे आजीवन कारावास ।
अहिंसा अवतार
भगवान महावीर
आपका 2600 वाँ
जन्म कल्याणक मनाकर भी
हम शर्मिन्दा हैं
क्योंकि आपकी
अंहिसा मर रही है और
हिंसा अभी जिंदा है
बडे धूम-धाम से मनाया
हमने आपका जन्म कल्याणक वर्ष
आतंकियों में छाया रहा पूरा हर्ष
ओसामा के धमाके
संसद में लड़ाके
कश्मीरी अंगारे और
गोधरा के हत्यारे
मानवता को चाट रहे हैं और
कुछ धर्मों के ठेकेदार
दुनियाँ को डाँट रहे हैं
आपके भक्तों ने व सरकार ने
किया है कमाल
आपके जन्म कल्याणक पर
लुटाया है माल
बनाई है ऊंची-ऊंची अट्टालिकायें
जलाई हैं दीप मालिकायें
कहीं भजन
कहीं गीत
कहीं संगीत
लेकिन नहीं मिली
अहिंसा को जीत
क्योंकि अहिंसा की जीत के लिये
जो करना था
वह हम जानते ही नही हैं
और आपका सिध्दांत
व्यक्ति का निर्माण
हम मानते ही नही है
नही चाहिये ऊँचे भवन अट्टालिकायें
नही चाहिये घंटे घड़ियाल मालिकायें
नही चाहिये भजन नाटक और गीत
हमें तो चाहिये
केवल मन का संगीत
आओ लोगों के मन में
अहिंसा का संगीत गुंजाये
मिलकर कदम बढ़ायें
मानव को मानव से जोड़ें
हम हिंसक प्रवृतियों को छोड़ें
दुनियाँ में फैले
प्रेम प्यार अनुराग
शांत हो हिंसा की आग
एक दिन करना ही पड़ेगा
दुनियाँ को
महावीर का रास्ता स्वीकार
सच्चे अर्थों में तभी होगी
भगवान महावीर आपकी जय-जयकार ।

निर्दोषों की हत्या को जो अपना धर्म बताते हैं
जेहादी नारों के दम पर द्वेष घृणा फैलाते हैं
जिनके फतवों के कारण धर्म आज शर्मिन्दा हैं
मानवता का हत्यारा ओसामा जब तक जिन्दा हैं
नापाक मदरसों में पढ़कर ये तालिबानी आये हैं
जिनके कारण आज विश्व में काले बादल छायें हैं
उग्रवाद की घटनाओं को अगर धर्म से जोड़ोगे
मानवता से धर्म का नाता तुम बिल्कुल ही तोड़ोगे
उन लोगो की क्या कहिये जो घर को आग लगाते हैं
अन्न यहाँ का खाते हैं और गीत वहाँ के गाते हैं
अमन चैन हमने दुनिया का हरगिज नहीं मिटाना हैं
आतंकवाद के कारिन्दों को मिलकर सबक सिखाना हैं ॥1॥

हम आतंकवाद को सहते दुनिया दर्शक बनी रही
उग्रवाद की हर साजिश पर निष्ठुर होकर तनी रही
पंजाब जला आतंकवाद से इन्दिरा का बलिदान हुआ
लंका में आतंकवाद से कितना लहुलुहान हुआ
लिट्टे के आतंकवाद से राजीव गांधी चले गये
आंतकवाद से लड़ते लड़ते हम सब कितना छले गये
मुंबई में दाऊद के गुंडे हमकों आँख दिखाते हैं
गुलशन जैसे भक्त यहां सड़को पर मारे जाते हैं
पर भारत आतंकवाद से कभी नहीं है घबराया
पंजाब समस्या को भी हमने अपने दम पर सुलझाया
अब उजड़ी केसर घाटी को फिर से हमे बसाना हैं ॥2॥

आतंकवाद की कोख को हम सब कह सकते है पाकिस्तान
ओसामा, मसूद और दाऊद ये सारे इसकी संतान
अमरीका की प्यार धुनो पर ओसामा ने डांस किया
अफगानी गलियों में जाकर चुपके से रोमांस किया
प्रेमिका बड़ी चालू थी प्रेमी का कान कतर डाला
अब ढूंढ रहे हैं बुश उसको लेकर हाथों में जयमाला
इस भारी-भरकम दुल्हन से बुश निकाह जरूर रचाएंगे
पाक करेगा कन्यादान अफगानी दहेज सजायेगें
हम हिन्दुस्तानी लोग सभी आज बनेंगे बाराती
तालिबान रोयेगा जैसे बेटी घर को है जाती
इस भारी-भरकम शादी से झूठा जेहाद मिटाना हैं ॥3॥

धर्म के ठेकेदारों ने आतंकवाद को भड़काया
खून-खून के रिश्तों को भी आपस में है लड़वाया
तलवार के दम पर कुछ हमको धर्म पढ़ाने आये हैं
स्कूल कालेजो में हमको कुछ धर्म सिखाने आये हैं
हम मानवता के अनुयाई हमने सबका ही मान किया
कुरान-बाईबल को हमने गीता जैसा सम्मान दिया
हम शिवशंकर के भक्त सभी धरती का जहर पिया हमने
गैरों को अपने आंगन में कैसा सम्मान दिया हमने
अब समय आ गया उग्रवाद से हम सबकों लड़ना होगा
धरती को अगर बचाना तो हमको तांडव करना होगा
इस भूली भटकी दुनिया को शक्ति का पाठ पढ़ाना हैं ॥4॥

बुध्द

तालिबान में
बुध्द की प्रतिमायें तोडने वालों
अल्लाह तुम्हे माफ करे
मिटा सकते हो तो मिटाओ
कोटी कोटी ह्रदयों में बसने वाले
उस बुध्द को
पत्थरों पर
बहादुरी दिखाने वालो
कायरों !
तुम्हारी कायरता ने
किया है करोडो ह्रदयों को घायल
कौन से धर्म का
परचम फहराना चाहते हो तुम
तुम्हारे अज्ञान ने
अपमानित किया है धर्म
धर्म का आवरण छोडें
ज्ञान से अपने को जोडें
बुध्द की शरण में जायें
बुध्द हो जायें
बुध्दम शरणम गच्छामी ।

हिन्दु मुस्लिम दीवारों को
जिसने तोड गिराया था
ननकाना में जन्म लिया
नानक नाम कहाया था
मुगलों के अत्याचारो से
जन जन मन घबराया था
गुरु चरणों में आकर के
बाबर ने शीश झुकाया था
गुरु नानक ने मानवता की
घर घर अलख जगाई थी
जिसके कारण ही भारत में
नई रोशनी आई थी ।

गान्धी जी के तीन बंदर
बुरा ना बोलो
बुरा ना सुनो और
बुरा ना देखो का संदेश गुंजाते है.
भारतीय मीडीया पर
इसका इतना गहरा असर पाते हैं
इनको केवल
बुरा ही दिखता है
बुरा ही सुनता है
और बुरा बोलना तो
इनका अधिकार है
क्योंकि
भारतीय मीडिया समाज का दर्पण नही
एक बाजार है।
बाजार यानी प्रदर्शन
प्रदर्शन यानी दिखावा
सच्चाई के साथ छलावा।
कुछ न कुछ बोलना
देश की बखिया उधेड़ना
सुर्खियाँ बखेरना
खबरें परोसना
इनकी मजबूरी है
क्योंकि विज्ञापन खरीदना
और खबरें बेचना
इनको बहुत जरूरी है।
ओसामा के धमाके
भले ही अमरीका को हिला गए
पर मीडिया का जलवा दिखा गए
जो मीडिया देश के साथ खडा होता है
वास्तव में, वही सबसे बडा होता है ।

कभी मुनि नथमल
आज महाप्रज्ञ।
आँखो से देखता हँ तो संत
कानों से सुनता हँ तो मनीषी और
पढ़ता हँ तो दार्शनिक लगते हैं।
”अक्षर को प्रणाम” काव्य संग्रह ने
एक नया इतिहास गढ़ा जब
उनको एक कवि के रूप में पढ़ा।
ये कवितायें नही
मन्त्र हैं, अनुष्ठान है
इनमें संगीत है, तान है
प्रेक्षा है, ध्यान है
अंहिसा का ज्ञान है
सत्य की गहराई है क्योंकि
ये कवितायें लिखी नहीं अपितु
संत के जीवन की पुण्याई है
अक्षर-अक्षर नयनाभिराम
कविवर महाप्रज्ञ को
शत-शत प्रणाम॥

महिला-आरक्षण पर
हो रही थी खुलकर चर्चा
कुछ महिलायें पढ रही थी पर्चा
सब के अपने तर्क और जबाब थे
कुछ के तो अलग ही अन्दाज थे
अंत में पत्नी पीडित अध्यक्ष बोले
जागरूकता बहुत जरुरी हैं
क्योंकी ये भारतीय लोकतन्त्र की मजबूरी हैं
जो महिला जागरूक होती हैं
पति से लडती हैं
ज्यादा जागरूक होती हैं
पडोसी से लडती हैं
और सर्वाधिक जागरूक महिला
चुनाव लडती हैं
इसलिये आइये
महिलाओं को अधिक से अधिक
जागरूक बनायें
और लोकतन्त्र बचायें।

हिमालय यानि
ईश्वर द्वारा भारत को मिला वरदान
मां गंगा का उदगम स्थान
आयुर्वेद की खान
वैदिक व बौध्द संस्कृति का गुणगान
भारत मां के माथे की शान
नगपति महान
घायल है
जातिवाद-भाषावाद, आंतकवाद की छाया
तस्करों की माया
धर्मान्तरण का मक्क्डजाल
और दुश्मनों की कदम ताल
हिमालय पर जारी है
ये भारत के साथ
बहुत बडी गद्दारी है
हिमालय यानि भारत
भारत यानि हिमालय
भारत को बचाना है तो
हिमालय को बचाओ
सांस्कृतिक शक्ति को जगाओं
धर्म की पताका लहराओं
हिमालय की गोदी मे खेलो
और मिलकर कहो
नगपति मेरा वंदन ले लो ।

जिस प्रकार माँ सन्तानों से करती हरदम निश्छल प्यार
सुखपूर्वक बड़ा हो गय धरती माता का उपकार
हिन्दुभूमि हे मंगलकरणी पुण्यभूमि महिमा महान
तेरी काया तब चरणों में नमस्कार माँ बारम्बार

अंगभूत हम हिन्दुराष्ट्र के परम पिता प्रणाम लीजिये
कार्य तुम्हारा पूर्ण कर दें हमको ये वरदान दीजिये
अजय-शक्ति हो पास हमारे शील विनय से जग को जीतें
कंटक पथ जो अपनाया है ज्ञान कराकर सुगम कीजिये

वीरव्रती हो हृदय हमारा इह परलोक भी हिल जायेगा
तीव्र हृदय निष्टा कारण मन दरवाजा खुल जायेगा
विजय शालिनी शक्ति द्वारा धर्म बचाना बहुत जरूरी
राष्ट्र परम वैभव की चोटी निश्चित हमको मिल जायेगा ।

पुणे

पुणे यानी
उत्सव की बहार
आत्मा का श्रृंगार
जीवन का गीत
मन का संगीत
ओशो की वाणी और
प्यार की कहानी है, इसलिये
पुणे विश्व की राजधानी है ।

दूरदर्शन का छोटा पर्दा उंगली ऊपर सदा मचलता
एक नहीं दो नहीं सैंकड़ो चैनल अदला बदला करता
शक्तिशाली इस डिब्बे में घूम रही आकाश तरगें
बचपन इसमें आज भटकता यौवन है बेडोर पतगें
सब चैनल अडल्ट हो गये रिश्तों की मर्यादा टूटी
बच्चों के संग क्या हम देखें परिवारों की किस्मत फूटी
जोड़ सके जो इस माटी से डब्बा ऐसा राग सुनाये
देशभक्ति का नवल गीत ले जन मन में जोश जगाये
इस डिब्बे में कब आयेंगे बाल्मिकी कवि सूर कबीरा
तुलसी बाबा की रामायण कृष्ण भक्ति में पागल मीरा
शक्तिशाली इस डिब्बे को आओ हम कुछ ऐसा कर दें
राष्ट्र प्रेम के संस्कारों से इस पावन डिब्बे को भर दें ।

मैत्रीभाव से जिसने जग में
सबको अपने गले लगाया
सदा मिली है उसको जग से
प्रेम वृक्ष की निर्मल छाया
दो शब्दों का चमत्कार ये
जिसने हमको मोड़ दिया है
क्षमाधर्म की महिमा देखो
जिसने हमको जोड़ दिया है
जाने या अनजाने मुझसे
कभी किसी ने कष्ट उठाया
नतमस्तक हूँ क्षमा कीजीये
क्षमाभाव का शुभ दिन आया ।

बहन ने भाई को पुकारा
आ गया
रक्षाबन्धन का त्यौहार दोबारा
फिर वहीं औपचारिकतायें
रेशम का धागा,टीका मिठाई
तुमने भी जेब मे हाथ डाला
रस्म निभाई
हो गया, रक्षाबन्धन
भैया!
ये साधारण से दीखने वाले
रेशम के धागे
धागे नही
रक्षा के बन्धन हैं
और तुम्हारे माथे पर
चमकने वाली ये रोली
रोली नही
भारत की माटी का
पावन चन्दन हैं
बहन की रक्षा का
पावन संकल्प उठाया है तुमने
तुमको बधाई
पर तुम्हारी बहन
तुमको इतनी कमजोर नजर आई ?
माना सीता सावित्री हमारी पहचान हैं
पर अपनी रक्षा करने को हम
रानी झांसी के समान हैं
भैया !
बहन की रक्षा की चिंता छोड, और
अपनी दृष्टि देश की सीमाओ की ओर मोड
जहाँ आस्तीन मे साँप है
पडोसी का अटट्हास है
दुश्मन की ललकार है, और
इतिहास की फटकार है
ब्रहम देश का बिछुडना
पाकिस्तान का कटना
आजाद कश्मीर
मानसरोवर कैलाश की पीर
तीन बीघा का दान
और घर में बैठे
आतंकी शैतान
इसलिये जब तक
देश की सीमाओं पर संकट है भारी
तुम्हारी बहन के भाग्य में
तब तक है लाचारी
क्योंकि, हो सकता हैं
इतिहास अपने को फिर दोहराये
और फिर कोई रावण
सीता को उठाने आये
और फिर हो
धर्म नाम पे, तुम्हारी बहनो पर
अत्याचार
इसलिये समय रहते जागो
आओ, मैं तुम्हारी कलाई पर
रेशम के मुलायम धागे बाँधू
और तुम उन कलाईयो से
देश की सीमाओं पर
रक्षा के संकल्प सूत्र बाँधो ।
मेरे एक मित्र हैं पदमेश
रहते हैं विदेश
करते हैं कविताई
एक दिन चिटठी आई
लन्दन आओ, कविता सुनाओ
हमने सोचा, किस्मत ने भी कैसा मंत्र है मारा
इसलिए भारत में प्रतिष्ठा पाने को
हमने तुरन्त ये आमंत्रण स्वीकारा
क्योंकी भारत में जब तक विदेश ना जाओ
कोई जानता ही नही
होगें आप महाकवि
पर कोई मानता ही नही
राम-रामा
कृष्ण-कृष्णा
योग-योगा और
आयुर्वेद आयुर्वेदा बनकर
जब भारत में प्रतिष्ठा पा सकते हैं तो
चेतन भी चेतना बनकर
भारत मे नई क्रांति ला सकते है
अत: विमान में हुये सवार
एक अंग्रेज हो गया हमारा यार
बैठते ही की बमबारी
लंदन कितना सुन्दर है, प्यारा है
हम अंग्रेजों ने मेहनत से संवारा है
मैनै कहा, हाँ भाई हाँ
बिल्डिगंस का तो जबाब नही
पर घर एक भी आबाद नही
माँ कहीं
बाप कहीं
औलाद तुम्हारे पास नही
और रही बात बीबी की, तो
वह एक कलैण्डर है
जो हर साल बदलना है
इसलिए इन भवनो का तुम्हें क्या करना है
भारत में बिल्डिंग नही घर होते हैं
जो घर की खुशी में हँसतें हैं
घर की गमी में रोते हैं
उसमें होता हैं मां का प्यार
बाप की फटकार
पत्नी की मुस्कान
बच्चों की शान
मेहमान का आना जाना
हमारे यहां घर एक घर होता हैं
नही होता कोई पब या मयखाना
माना की तुम्हारे यहां, फादर डे-मदर डे
बडी शान से मनाते हैं
जिन्दा मां बाप पर साल में एक दिन
फूल चढाते हैं
पर हम तो घर में
हर दिन फादर डे
हर दिन मदर डे ही पाते हैं
और रही बात फूल चढाने की, तो
वह कार्यक्रम भी संसार से उनके जाने के बाद
साल में केवल एक दिन नही
श्राद्ध पक्ष में, पूरे पन्द्रह दिन चलता हैं
और पूरा परिवार उनको याद करता हैं
तभी अंग्रेज बोला
वाट अबावट वेलनटाईन डे!
बाय फ्रेंड, गर्ल फ्रेंड रोमान्स
प्यार का तुम्हारे यहां नही कोई चान्स
मैने कहा कितना गलत है आपका आरोप
प्यार के मामले में क्या कर लेगा यूरोप
तुम्हारे यहाँ प्यार का गीत
केवल एक दिन गाते हैं
हम तो फाल्गुन का पूरा महीना
वेलनटाईन मनाते है
मेरी बात सुनकर
अँग्रेज झल्लाया, तिलमिलाया, चिल्लाया
यू ब्लैक इंडियन!
मैनै कहा,चेहरे से हम काले हैं
पर दिल में हमारे उजाले हैं
और रही तुम्हारे चेहरे की लाली
तो वह भी तुम्हारी नही
पराई हैं
तुमने दुनिया के लोगो से चुराई हैं
दुनिया का रक्त बहाकर
तुम्हारा चेहरा हो गया लाल
अब काहे को ठोक रहे हो ताल
लूटा है हमारा ही माल
गौरे चेहरे पर ज्यादा मत इतराओं
पहले आदमी बन कर दिखाओं
भारत की शरण में आओ
जीओ और जीने दो का सिध्दान्त अपनाओ
और, दुनियों को महकाओ
मैने अँग्रेज मित्र से कहा
दुनिया मे है केवल दो विचार
एक रोम ओर एक राम
मानवता की रक्षा करना चाहते हो तो
रोम को छोड राम को स्वीकार ।

हंसना और हंसाना मित्रों मुझको भी तो आता है
द्विअर्थी संवादों से मन मेरा घबराता है
भौंडे फिल्मी गाने सुनना हमें सुहाना लगता है
सँस्कारों की अर्थी पर फूल चढाना पड़ता है
पश्चिम का ये नंगापन हमको तो स्वीकार नही
इस बेशर्मी का सब मिलकर करते क्यों प्रतिकार नही
युवा पीढी बरबादी से मन मेरा जब डरता है
वातावरण देखकर मुझको आग उगलना पड़ता है ॥ 1 ॥

कवि लेखक साहित्यकार क्या अपना फर्ज निभाता है
गली गली में घूम घूम क्या माँ का दर्द सुनाता है
केवल ताली पिटवा लेना कवि का कर्म नही होता
ऊल जलूल को कविता कहना लोगों धर्म नही होता
कवि समाज का दृष्टा होता राष्ट्र जागरण करता है
नेता हो या नगर सेठ वह नही किसी से डरता है
कवि धर्म की मर्यादा का ध्यान नहीं जब रखता है
वातावरण देखकर मुझको आग उगलना पड़ता है ॥ 2 ॥

लोकतन्त्र का स्तम्भ साथियों पत्रकार हमारा है
विज्ञापन अखबार बेचना उसको सबसे प्यारा है
पत्रकार सम्मेलन भी जब मंडी सा बन जायेगा
लोकतन्त्र की मर्यादा को कैसे कौन बचायेगा
कलम सिपाही कलम ना बेचो ये हथियार तुम्हारा है
सौ करोड़ लोगों के स्वर का तू ही एक सहारा है
लोकतन्त्र का रक्षक ही जब अंधियारे में दिखता है
वातावरण देखकर मुझको आग उगलना पड़ता है ॥ 3 ॥

स्वार्थ के चक्कर मे हम ही रिश्वत को अपनाते हैं
जरा काम जो रूक जाये तो जाकर भेंट चढाते हैं
रिश्वत लेना बहुत बुरा है रिश्वत देना पाप कहो
दो कोड़ी के लोगों को काहे को तुम बाप कहो
बाते बडी बडी करते हो भ्रष्टाचार मिटाने की
खुल्लम खुल्ला रिश्वत देते बाते नही शर्माने की
भ्रष्टाचारियों के कारण जब जग भारत पर हँसता है
वतावरण देखकर मुझको आग उगलना पडता हे ॥ 4 ॥

हिन्दु दर्शन का पावन झण्डा
दुनिया में फहराया था
राम कृष्ण परमहंस को
अपना गुरु बनाया था
दीन दुखी भारतवासी पर
अपना प्यार लुटाया था
सेवा को ही मिशन बनाकर
सबको गले लगाया था
विश्व पटल पर भारत भू की
जिसने धूम मचाई थी
भारत माँ के इस बेटे ने
माँ की लाज बचाई थी ।